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अमेरिका की रक्षा चुनौतियाँ: भारत की कंपनियों की ओर बढ़ता ध्यान

अमेरिका, जो खुद को दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर मानता है, अब गंभीर रक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। लॉकिड मार्टिन ने भारत की प्रमुख डिफेंस कंपनियों से संपर्क किया है, जबकि ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमताएँ अमेरिका के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। इस लेख में अमेरिका की रक्षा समस्याओं, भारत की भूमिका और ईरान की रणनीतियों पर चर्चा की गई है।
 

अमेरिका की नई चुनौतियाँ

अमेरिका, जो खुद को दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर मानता है, अब एक गंभीर समस्या में फंस गया है। हाल ही में, अमेरिका ने दावा किया था कि उसके पास अनलिमिटेड मिसाइलें हैं, लेकिन अब यह दावा कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। अमेरिका की प्रमुख रक्षा कंपनी लॉकिड मार्टिन ने भारत की दो प्रमुख डिफेंस कंपनियों, टाटा एडवांस सिस्टम्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से संपर्क किया है।


यह ध्यान देने योग्य है कि सितंबर 2025 में अमेरिकी सेना ने लॉकिड मार्टिन के साथ लगभग 9.8 बिलियन डॉलर का एक बड़ा समझौता किया था, जिसके तहत उन्हें 1970 पैक थ्री इंटरसेप्ट मिसाइलें मिलनी थीं। ये वही मिसाइलें हैं जो पेट्रियोट मिसाइल डिफेंस सिस्टम में उपयोग की जाती हैं। इनका मुख्य कार्य दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को हवा में नष्ट करना है।


मिसाइलों की कमी और ईरान की चुनौती

हालांकि, अमेरिका ने 1970 इंटरसेप्टर मिसाइलों का ऑर्डर दिया है, लेकिन उनकी डिलीवरी में देरी हो रही है। इस बीच, मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं, खासकर ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के कारण। रिपोर्टों के अनुसार, यूएई ने हाल के तनाव के दौरान अपनी छह पेट्रियोट बैटरी को सक्रिय कर दिया है, जिससे 390 से अधिक पैक थ्री इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी जा चुकी हैं।


यूएई के पास अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है, जिससे उन्हें दक्षिण कोरिया के इंटरसेप्टर सिस्टम का सहारा लेना पड़ा है। यदि सैकड़ों या हजारों ड्रोन और मिसाइलों का हमला होता है, तो 20,000 इंटरसेप्टर मिसाइलें भी जल्दी खत्म हो सकती हैं।


अमेरिका की उत्पादन चुनौतियाँ

अमेरिका की असली समस्या यहीं से शुरू होती है। ईरान सस्ते लेकिन बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलों का निर्माण कर रहा है, जबकि अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलें महंगी होती हैं। एक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर तक हो सकती है। यदि दुश्मन सस्ते ड्रोन और मिसाइलों की बाढ़ ला देता है, तो उन्हें रोकना बेहद महंगा और कठिन हो जाता है।


इस संकट के पीछे एक और बड़ा कारण यूरोप की नीति है। हाल ही में, डोनाल्ड ट्रंप ने स्पेन को लेकर कड़ा बयान दिया था, जिसमें उन्होंने नाटो से स्पेन को बाहर निकालने की धमकी दी थी। लेकिन ट्रंप शायद यह भूल गए कि अमेरिकी मिसाइल उद्योग में स्पेन और अन्य यूरोपीय देशों का भी योगदान है।