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अमेरिका की सर्जिकल स्ट्राइक: ईरान पर हमला और उसके पीछे की वजहें

9 जून की रात, अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की, जिससे खाड़ी में तनाव बढ़ गया। यह हमला ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करने के लिए किया गया था। अमेरिका का दावा है कि यह आत्मरक्षा में किया गया था, जबकि ईरान पर हमले के पीछे की कहानी 8 जून से शुरू होती है। जानें इस हमले के कारण, ईरान की धमकियाँ और अमेरिका की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

खाड़ी में आग का तूफान

9 जून की रात, जब अधिकांश लोग सो रहे थे, तब खाड़ी के देशों में आसमान में आग की लपटें उठ रही थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति के एक आदेश ने मध्य पूर्व के हालात को पूरी तरह से बदल दिया। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की, जो इतनी सटीक और घातक थी कि ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम ध्वस्त हो गया। लेकिन अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया? अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि उनकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा में यह कार्रवाई की है। यह कोई साधारण झड़प नहीं थी।


हमले का उद्देश्य

अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के अत्याधुनिक फाइटर जेट्स ने ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया जो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थे। पहले निशाने पर ईरान के एयर डिफेंस साइट्स थे, ताकि वे जवाबी हमला न कर सकें। इसके अलावा, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाले रडार भी लक्ष्य बने। इस हमले की कहानी 8 जून से शुरू होती है, जब अमेरिकी सेना का एक अपाचे हेलीकॉप्टर गिराया गया था।


ईरान का हाथ?

अमेरिका का दावा है कि इस हमले के पीछे ईरान समर्थित ताकतों या स्वयं ईरान का हाथ था। अमेरिका में एक स्पष्ट नियम है: यदि कोई अमेरिकी सैनिक या संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो परिणाम गंभीर होंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने तुरंत जवाबी कार्रवाई का आदेश दिया, और अगले दिन ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। ये हमले स्टेट ऑफ हॉर्मुज के पास किए गए, जो दुनिया के लगभग 20 से 30% कच्चे तेल का मार्ग है।


ईरान की धमकियाँ

ईरान अक्सर इस मार्ग को बंद करने की धमकी देता है। अमेरिका का कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा है। यह हमला ईरान को एक स्पष्ट संदेश है कि समुद्र में उसकी दादागिरी नहीं चलेगी। पेंटागन ने इसे एक प्रपोशनल रिस्पांस कहा है, जिसका अर्थ है कि अमेरिका ने उतना ही सटीक जवाब दिया जितना नुकसान उन्हें हुआ। पिछले कुछ महीनों में मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले बढ़ रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि वे युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए चुप नहीं बैठेंगे।