अमेरिका के नए प्रतिबंध: ईरान और चीन के बीच बढ़ती कूटनीतिक जटिलताएँ
वैश्विक कूटनीति में बदलाव
वर्तमान समय में वैश्विक कूटनीति और घरेलू राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अमेरिका ने ईरान की आर्थिक स्थिति को कमजोर करने के लिए चीनी रिफाइनरियों और जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इस बीच, इस्लामाबाद में चल रही 'ईरान-यूएस वार्ता' नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। इसी संदर्भ में, अमेरिका ने एक चीनी तेल रिफाइनरी और 40 अन्य शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है, जिन पर ईरानी तेल के परिवहन में संलिप्त होने का आरोप है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा से कुछ हफ्ते पहले उठाया गया है, जहां वे शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे।
चीनी रिफाइनरी पर प्रतिबंध
एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस चीनी रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाया गया है, वह हेंगली पेट्रोकेमिकल है, जो डालियान में स्थित है। यह रिफाइनरी प्रतिदिन 400,000 बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता रखती है, जिससे यह चीन की सबसे बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों में से एक बन जाती है।
हेंगली ने 2023 से ईरानी तेल को प्रोसेस करना शुरू किया है, जिससे उसे लाखों डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ है। 'यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान' नामक एडवोकेसी ग्रुप ने बताया कि यह कंपनी ईरानी तेल के कई चीनी खरीदारों में से एक है।
चीन की प्रतिक्रिया
चीन ने अभी तक अमेरिका के इस कदम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वह ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने से पहले, चीन ने एक 'शैडो फ्लीट' के माध्यम से 80 से 90 प्रतिशत ईरानी तेल का आयात किया। इन जहाजों का मूल स्रोत अभी भी अस्पष्ट है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, ये संभवतः मलेशिया जैसे देशों से आते हैं।
ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध
अमेरिका ने पहले भी देशों को ईरानी तेल खरीदने के खिलाफ चेतावनी दी थी। हाल ही में एक मीडिया ब्रीफिंग में, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यदि कोई देश ईरानी तेल खरीदता है या ईरानी धन अपने बैंकों में रखता है, तो अमेरिका उन पर 'सेकेंडरी सैंक्शन' लगाने के लिए तैयार है।
इसके बाद, ट्रेजरी विभाग ने चीन, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और हांगकांग को एक पत्र भेजकर चेतावनी दी कि ईरान के साथ व्यापार करने पर उन पर सेकेंडरी सैंक्शन लगाया जा सकता है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने इन प्रतिबंधों की आलोचना की है और उन्हें हटाने की मांग की है। चीन ने भी ईरान का समर्थन किया है, भले ही उसकी बड़ी कंपनियाँ और बैंक अमेरिका के प्रतिबंधों का पालन करते हैं। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने कहा कि यह कदम अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को कमजोर करता है और सामान्य आर्थिक आदान-प्रदान में बाधा डालता है।