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अमेरिका ने ईरान के प्रतिनिधिमंडल को यूएनजीए में शामिल होने की दी अनुमति, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति का वीजा रोका

अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल को न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने की अनुमति दी है, जबकि फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास का वीजा रोक दिया गया है। यह निर्णय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच आया है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच तनाव और बातचीत की कोशिशें जारी हैं। जानें इस कूटनीतिक घटनाक्रम के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
 

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस को जन्म दिया है। अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची सहित उनके मुख्य प्रतिनिधिमंडल को अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने की अनुमति दे दी है। इसके विपरीत, अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और उनके प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने से मना कर दिया है। यह निर्णय उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को सात महीने हो चुके हैं, और दोनों पक्षों के बीच तनाव के साथ-साथ संवाद की कोशिशें भी जारी हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ईरान के प्रतिनिधिमंडल को यूएनजीए उच्च स्तरीय सप्ताह में शामिल होने की अनुमति दी गई है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और अन्य आवश्यक स्टाफ शामिल होंगे। हालांकि, यह प्रतिनिधिमंडल पिछले वर्ष की तुलना में छोटा होगा। इसके अलावा, ईरानी अधिकारियों पर न्यूयॉर्क में यात्रा से संबंधित प्रतिबंध लागू रहेंगे और कुछ वस्तुओं की खरीद पर भी रोक होगी।


अमेरिका का वीजा देने का कारण

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका ने ईरान को वीजा क्यों दिया, जबकि दोनों देश युद्ध में हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसका मुख्य कारण संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को बताया है। 1947 में अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के बीच हुए मुख्यालय समझौते के तहत, अमेरिकी सरकार आमतौर पर यूएन बैठकों में भाग लेने वाले विदेशी प्रतिनिधियों को अमेरिका में प्रवेश देने के लिए बाध्य है। हालांकि, अमेरिका ने सुरक्षा और अपनी नीतियों के तहत ईरानी प्रतिनिधिमंडल की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इस निर्णय को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष के बावजूद, युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत के प्रयास होते रहे हैं, हालांकि ये प्रयास विफल रहे हैं। ऐसे में न्यूयॉर्क में दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति बातचीत के लिए एक संभावित मंच प्रदान कर सकती है।


फिलिस्तीनी राष्ट्रपति का वीजा रोकना

हालांकि, अमेरिका ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने का निर्णय किसी नए युद्ध विराम या संघर्ष विराम समझौते का हिस्सा है। इसलिए इसे युद्ध विराम से जोड़ना जल्दबाजी माना जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास का वीजा रोक दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने आरोप लगाया है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण और पीएलओ ने इजराइल-फिलिस्तीन विवाद को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया है। अमेरिका ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) में इजराइल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का मुद्दा उठाया है। इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन ने इजराइल के खिलाफ हमलों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों के परिवारों को कथित भुगतान का भी उल्लेख किया है।