अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाया, पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण
पश्चिम एशिया में तनाव और कूटनीतिक बदलाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के विशेष अनुरोध पर ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब पहले से निर्धारित दो सप्ताह का युद्धविराम समाप्त होने में कुछ ही घंटे बचे थे। ट्रंप ने इस निर्णय के पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के व्यक्तिगत अनुरोध को मुख्य कारण बताया।
युद्धविराम की घोषणा और वार्ता की स्थिति
यह घोषणा तब की गई जब आठ अप्रैल को घोषित युद्धविराम समाप्त होने वाला था। इसके साथ ही, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा भी प्रभावी रूप से टल गई, जहां ईरानी प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता प्रस्तावित थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान पर हमला करने से तब तक बचेगा जब तक ईरान का नेतृत्व बातचीत के लिए एक समेकित प्रस्ताव नहीं पेश करता।
ट्रंप का बयान और कूटनीतिक गतिविधियाँ
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपनी सेना को नाकेबंदी जारी रखने और अन्य मामलों में पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया है। यह निर्णय वॉशिंगटन, इस्लामाबाद और तेहरान के अधिकारियों के बीच कई दिनों से चल रही गहन कूटनीतिक गतिविधियों के बाद लिया गया। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को इस्लामाबाद जाने का कार्यक्रम था, लेकिन उन्हें व्हाइट हाउस में अतिरिक्त बैठकों में शामिल होने के लिए कहा गया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का आभार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप का आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष एक व्यापक शांति समझौते तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संघर्ष के बातचीत से समाधान के लिए गंभीर प्रयास जारी रखेगा।
अमेरिकी वित्त मंत्री की चेतावनी
इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात में 14 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ईरान के समुद्री व्यापार पर रोक उसके राजस्व के मुख्य स्रोतों पर चोट करेगी।