अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन: क्या लोकतंत्र खतरे में है?
अमेरिका में गुस्से का उबाल
जब ईरान में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तब वाशिंगटन में स्थिति अलग थी। अब वही गुस्सा न्यूयॉर्क, टेक्सास और कैलिफोर्निया की सड़कों पर देखने को मिल रहा है। क्या अली खामेनी के खिलाफ जो हुआ, वही अब अमेरिका में भी हो रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि लगभग 1 करोड़ अमेरिकी सड़कों पर उतर आए हैं। वे डोनाल्ड ट्रंप पर तानाशाह की तरह व्यवहार करने का आरोप लगा रहे हैं, और इसके पीछे कई कारण हैं। लगभग 80 लाख से 1 करोड़ अमेरिकी ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह संख्या दुनिया के 135 देशों की जनसंख्या से भी कम है। अमेरिका की चौड़ी और हमेशा व्यस्त रहने वाली सड़कों पर ट्रंप विरोधी पोस्टर लिए लोग नजर आ रहे हैं। अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3300 से अधिक स्थानों पर लोग एक ही बात कह रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रंप अमेरिका को तानाशाही के तरीके से चला रहे हैं।
प्रदर्शन का विस्तार
अमेरिका के प्रमुख शहरों जैसे न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलेस में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। जहां शहर बड़ा है, वहां प्रदर्शन भी उतना ही विशाल है। लोग ट्रंप से इतनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं कि उनकी तुलना एक राजा से की जा रही है, जो अपनी सेना के साथ बंद कमरों में निर्णय लेते हैं और उसे देश पर थोप देते हैं। प्रदर्शनकारी यह भी कह रहे हैं कि ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध बिना कांग्रेस की अनुमति के शुरू किया। उनके विरोधियों का कहना है कि राजा ऐसा ही करता है, जबकि राष्ट्रपति को सभी की राय लेनी चाहिए।
नो किंग प्रोटेस्ट का परिचय
नो किंग एक ग्रासरूट आंदोलन है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके शासन के तरीके का विरोध करता है। प्रदर्शनकारी उन्हें 'तानाशाही शैली' का नेता मानते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा समझते हैं। आयोजकों के अनुसार, 3,300 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं, जिसमें 80 लाख लोग शामिल हुए। हालांकि, प्रशासन ने आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं। यह पिछले एक साल में तीसरा बड़ा विरोध प्रदर्शन है।
लोगों की नाराजगी के मुद्दे
प्रदर्शनकारियों की मुख्य नाराजगी ट्रंप की कड़ी इमिग्रेशन नीतियों, कार्यकारी आदेशों के माध्यम से निर्णय लेने की शैली और ईरान के साथ बढ़ते युद्ध को लेकर है। कई लोगों का मानना है कि इससे देश का लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर हो रहा है। न्यू यॉर्क सिटी, वॉशिंगटन, और मिनियापोलिस जैसे बड़े शहरों में भारी भीड़ देखी गई है, जहां हजारों लोगों ने रैलियां और मार्च निकाले।