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अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट को मंजूरी दी

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को 262-159 के मत से मंजूरी दी है। यह विधेयक राष्ट्रपति को उन देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूसी तेल और गैस खरीदते हैं। बिल का उद्देश्य रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना है। डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने इस पर विरोध जताया है, जबकि बिल का नाम साउथ कैरोलिना के सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। यह कानून भारत और चीन जैसे देशों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
 

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का ऐतिहासिक निर्णय

अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को 262-159 के मत से स्वीकृति प्रदान की है। यह महत्वपूर्ण विधेयक पहले ही सीनेट द्वारा पारित किया जा चुका है और अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। यह कानून राष्ट्रपति को उन देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूसी तेल और गैस खरीदते हैं।


किसने दिया समर्थन?

इस बिल के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक स्वतंत्र सदस्य ने वोट दिया, जबकि 7 रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने इसका विरोध किया। डेमोक्रेटिक विरोध मुख्य रूप से ट्रंप को दिए गए टैरिफ अधिकारों पर केंद्रित था।


बिल का उद्देश्य

इस विधेयक का नाम साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका जुलाई में निधन हो गया था। उन्होंने इस बिल के लिए समर्थन जुटाने में एक साल से अधिक समय बिताया। बिल पर चर्चा के दौरान डेमोक्रेट कांग्रेसी रिचर्ड नील ने कहा, "हम इस राष्ट्रपति को और अधिक टैरिफ अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं।"


रूस और ईरान पर प्रतिबंध

'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' का उद्देश्य न केवल रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना है, बल्कि उन जहाजों के "शैडो फ्लीट" पर भी प्रतिबंध लगाना है जो मॉस्को को तेल की डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।


चीन और भारत को चेतावनी

बिल के पारित होने के बाद, डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा, "चीन और भारत, बेहतर होगा कि आप अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें।" डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शाहीन ने बताया कि रूस शैडो फ्लीट का उपयोग करके तेल और गैस बेच रहा है, जिसका अधिकांश हिस्सा चीन और भारत जैसे देशों में जा रहा है।


भारत के लिए संभावित प्रभाव

यह कानून भारतीय सामानों पर अपने-आप 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाता है। इसके बजाय, यह एक ऐसा तंत्र स्थापित करेगा जिसके माध्यम से अमेरिकी राष्ट्रपति उन देशों पर 100 प्रतिशत तक ड्यूटी लगा सकते हैं जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं।


सूचीबद्ध देश

भारत
चीन
UAE
तुर्की
अज़रबैजान
हंगरी
सिंगापुर
कजाकिस्तान
किर्गिस्तान
स्लोवाक गणराज्य


बिल का समय

दिलचस्प बात यह है कि यह बिल उस अंतिम दिन पारित हुआ जब 3 नवंबर के चुनावों से पहले वोटिंग के लिए हाउस का सत्र चलने की उम्मीद थी। यह वोटिंग ऐसे समय में हुई जब यूक्रेन-समर्थक समूहों ने अपने मकसद के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं।


अंतरराष्ट्रीय समाचार

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