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अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप के नए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत में दी चुनौती

डेमोक्रेटिक पार्टी के 25 राज्यों ने राष्ट्रपति ट्रंप के नए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की है। उनका तर्क है कि यह निर्णय उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर अतिरिक्त लागत का बोझ डालेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि वह बंधुआ मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर पुराने शुल्कों को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। भारत भी इस सूची में शामिल है, जिस पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया गया है।
 

ट्रंप प्रशासन के आयात शुल्क पर विवाद

वाशिंगटन, चार अगस्त: डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें अमेरिका के कुल आयात का 99.4 प्रतिशत हिस्सा रखने वाली 60 देशों पर नए आयात शुल्क लगाए गए हैं। पिछले महीने, अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर उचित कार्रवाई न होने के कारण इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए शुल्क लगाए थे। ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हुए 10 प्रतिशत के वैश्विक आयात शुल्क के स्थान पर लागू किए गए हैं।


राज्यों की याचिका और तर्क

इन 25 राज्यों ने सोमवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में ट्रंप प्रशासन के इस निर्णय के खिलाफ याचिका दायर की। उनका कहना है कि इस कदम से देशभर में उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और अन्य डेमोक्रेटिक राज्यों ने न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने की मांग की है।


भारत पर प्रभाव

जेम्स ने कहा, "उच्चतम न्यायालय में हार के बाद भी प्रशासन एक बार फिर नए शुल्कों के माध्यम से परिवारों और व्यवसायों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।" भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन 14 जून को भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह राहत मिली।


कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन

प्रशासन का दावा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के लिए 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को फिर से लागू करने का एक बहाना है, जिन्हें पहले लागू करने के प्रयास विफल हो चुके हैं। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, "प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे, लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करते हैं कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।"