अमेरिकी विशेष बलों का वेनेजुएला पर आक्रमण: ट्रंप की चेतावनी और लैटिन अमेरिका की प्रतिक्रिया
वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई
नए साल की शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद, अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला पर हमला किया, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को कराकस से उठाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस कार्रवाई के बाद कहा कि वेनेजुएला एक अकेला मामला नहीं है। उन्होंने मेक्सिको, कोलंबिया और क्यूबा को भी अपनी निगरानी सूची में शामिल किया।
3 जनवरी को हुए इस सैन्य हमले के तुरंत बाद, लैटिन अमेरिका के राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। कई राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना बताया।
लैटिन अमेरिका की प्रतिक्रिया
लैटिन अमेरिका के तीन प्रमुख देश, ब्राजील, मेक्सिको और कोलंबिया, जो वामपंथी नेताओं द्वारा शासित हैं, ने इस कार्रवाई को अपहरण करार दिया। वहीं, अर्जेंटीना, अल सल्वाडोर और इक्वाडोर ने ट्रम्प का खुलकर समर्थन किया। ग्वाटेमाला और पेरू जैसे छोटे देशों ने इस मामले में चुप्पी साधी रखी।
अमेरिका की मैक्सिकन सीमा पर सैन्य गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रम्प वेनेजुएला के बाद मैक्सिको पर भी हमला करने की योजना बना रहे हैं।
मेक्सिको की सुरक्षा चिंताएं
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबाम ने ट्रम्प के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें देश के ड्रग कार्टेल के खिलाफ अमेरिकी सेना का इस्तेमाल करने की बात कही गई थी। मादुरो की सत्ता से बेदखली के बाद, मेक्सिको के सुरक्षा अधिकारियों को अमेरिका की संभावित मांगों को लेकर चिंता हो रही है।
शाइनबाम ने कहा कि ट्रम्प पहले भी ऐसे प्रस्ताव दे चुके हैं, लेकिन मादुरो की गिरफ्तारी के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। पिछले हफ्ते एक टेलीविजन इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अमेरिका "कार्टेल के खिलाफ जमीनी कार्रवाई शुरू करने जा रहा है," और ये गिरोह मेक्सिको को नियंत्रित करते हैं।