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अमेरिकी संसद में एच-1 बी वीजा पर 3 साल की रोक लगाने वाला बिल पेश

अमेरिकी संसद में एच-1 बी वीजा पर 3 साल की रोक लगाने वाला एक नया बिल पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। इस बिल का सबसे अधिक प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि हर साल जारी होने वाले एच-1 बी वीजा में से अधिकांश भारतीयों को मिलते हैं। इसके अलावा, वीजा की फीस में भी भारी वृद्धि की गई है, जिससे भारतीय प्रतिभा अन्य देशों की ओर रुख कर सकती है।
 

एच-1 बी दुरुपयोग रोकथाम बिल-2026 का उद्देश्य


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के सांसदों ने एच-1 बी वीजा पर तीन साल की रोक लगाने वाला एक नया बिल पेश किया है। इस बिल का नाम एच-1 बी दुरुपयोग रोकथाम बिल-2026 है, जिसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। एरिजोना के सांसद एली क्रेन ने इस प्रस्ताव को संसद में रखा है।


इस बिल पर हस्ताक्षर करने वाले अन्य सांसदों में ब्रैंडन गिल, पॉल गोसर और एंडी ओगल्स शामिल हैं। इस बिल को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सांसदों का भी समर्थन मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, यदि 100 सांसदों की सीनेट में 60 सांसदों का समर्थन मिलता है, तो इस साल के अंत तक वोटिंग संभव है।


भारतीयों पर प्रभाव

इस बिल का सबसे अधिक प्रभाव भारतीय नागरिकों पर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका में हर साल जारी होने वाले लगभग 85,000 एच-1 बी वीजा में से लगभग 63,000 वीजा भारतीय पेशेवरों को मिलते हैं। इसके बाद चीन के पेशेवरों का स्थान आता है। ट्रम्प के कट्टरपंथी समर्थक एच-1 बी वीजा के खिलाफ रहे हैं, उनका मानना है कि विदेशी पेशेवर, विशेषकर भारतीय, अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों पर कब्जा कर रहे हैं।


ट्रम्प अपने वोटर बेस के कारण इस वीजा को कठिन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


फीस में वृद्धि

पिछले साल ट्रम्प ने एच-1 बी वीजा की फीस को लगभग 100 गुना बढ़ाकर 94 लाख रुपए कर दिया था, जिससे इस वीजा श्रेणी में अमेरिका में प्रवेश करना पहले से ही कठिन हो गया है। इसके अलावा, वीजा स्टैम्पिंग के लिए भारत आना अनिवार्य है, लेकिन यहां अमेरिकी दूतावासों में रिनुअल इंटरव्यू की संख्या बहुत कम हो गई है। जनवरी के इंटरव्यू अब नवंबर-दिसंबर तक रीशेड्यूल हो चुके हैं, जिससे कई पेशेवर अपनी नौकरियां खो चुके हैं।


टेक कंपनियों की भूमिका

भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के स्नातक तैयार करता है, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कंपनियां जैसे इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL अपने कर्मचारियों को एच-1 बी वीजा स्पॉन्सर करने में सबसे आगे हैं।


कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा पेशेवरों का निर्यात करता है। अब जब फीस बढ़ गई है, तो भारतीय प्रतिभा यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मध्य पूर्व के देशों की ओर रुख कर सकती है।