अमेरिकी सांसदों ने एफबीआई से मंदिर पर गोलीबारी की साजिश की जांच की मांग की
सांसदों का एफबीआई को पत्र
105 से अधिक अमेरिकी सांसदों ने संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के निदेशक काश पटेल को एक पत्र भेजा है, जिसमें इलिनॉय में एक मंदिर पर गोलीबारी की साजिश को घृणा अपराध के रूप में जांचने का अनुरोध किया गया है। सांसदों ने भारतीय-अमेरिकियों को लक्षित कर इंटरनेट पर दी जा रही धमकियों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है। यह पत्र शिकागो के पास ऑरोरा में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 19 वर्षीय एक युवक द्वारा गोलीबारी के प्रयास के कुछ दिन बाद लिखा गया।
घटना का विवरण
हालांकि, युवक की बंदूक जाम हो गई, जिससे एक बड़ी घटना टल गई। इस पत्र में चार सीनेटरों सहित 105 सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के बयानों की आलोचना की है। सांसदों का कहना है कि प्रशासन के कुछ बयानों ने नस्ल और धर्म से जुड़ी रूढ़िवादी धारणाओं को बढ़ावा दिया है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सांसद
पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, अमी बेरा, सुहास सुब्रमण्यम और श्री थानेदार शामिल हैं। सांसदों ने गृह मंत्रालय की एक सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख किया, जिसमें एक सिख व्यक्ति की तस्वीर के साथ लिखा गया था, 'हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम गाड़ी चलाना नहीं जानते, मिस्टर सिंह।' इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा विभाग की एक पोस्ट का भी हवाला दिया, जिसमें टेक्सास के एक रिपब्लिकन नेता द्वारा दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई गई थी।
सामाजिक मीडिया पर नफरत का बढ़ता स्तर
सांसदों ने 20 अक्टूबर को लिखे पत्र में चिंता व्यक्त की कि प्रशासन के बयानों से इन समुदायों के प्रति शत्रुता और बढ़ सकती है। उन्होंने सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ 5,42,000 से अधिक नफरत फैलाने वाली पोस्ट की पहचान की गई थी।
एफबीआई से स्पष्टता की मांग
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ऐसी पोस्ट की मासिक संख्या में लगभग 240 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सांसदों ने एफबीआई से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि क्या वह ऑरोरा मामले में संभावित नस्लीय, जातीय और धार्मिक पूर्वाग्रह के पहलुओं की जांच कर रही है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा है कि क्या किसी ऑनलाइन मंच या अन्य व्यक्ति ने इस कथित साजिश को बढ़ावा दिया था और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।