अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंधों के लिए भारत और चीन को किया लक्षित
रूस सेक्शन बिल का पारित होना
अमेरिकी सीनेट ने 8612 के विशाल बहुमत से एक ऐसा बिल पारित किया है, जिसमें एक धारा है जो भारत पर 100% टैरिफ लगाने की अनुमति देती है। वाशिंगटन के कैपिटल हिल में वोटिंग के दौरान माहौल काफी भावुक और तनावपूर्ण था। यह बिल सेनेटर लिंडसे ग्राहम का सपना था, जो यूक्रेन के प्रमुख समर्थकों में से एक माने जाते थे। विडंबना यह है कि जिस दिन ग्राहम का अंतिम संस्कार हुआ, उसी दिन सीनेट ने उनके द्वारा तैयार किए गए इस बिल को मंजूरी दी। रिचर्ड, जो इस बिल पर ग्राहम के साथ काम कर रहे थे, ने बताया कि ग्राहम ने मरने से एक दिन पहले इस डील को 'बिग इफिंग डील' कहा था। जेलेंस्की ने भी इसे ग्राहम की विरासत के रूप में प्रस्तुत किया है। यह जेलेंस्की के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि इससे रूस को वित्तीय सहायता मिलना बंद हो जाएगा।
भारत और चीन पर टारगेट
अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर ने कहा कि यह बिल, जो रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार किया गया है, विशेष रूप से भारत और चीन को लक्षित करता है। विकर ने कहा कि ये दोनों देश मॉस्को की युद्ध मशीन को समर्थन देने में मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह बिल अमेरिका के सहयोगी देशों पर असर नहीं डालेगा। मंगलवार को सीनेट में हुई प्रक्रियात्मक वोटिंग के दौरान इस विवादास्पद बिल को आगे बढ़ाया गया। विकर ने कहा कि इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि यह सहयोगियों को नुकसान न पहुंचाए, बल्कि चीन और भारत पर प्रभाव डाले।
भारत की ऊर्जा निर्भरता पर सवाल
भारत के विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है। कुछ मुख्य बिंदु हैं: पहला, क्या भारत ट्रंप प्रशासन को यह समझा पाएगा कि उसकी ऊर्जा आवश्यकताएँ युद्ध को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि अपने 140 करोड़ से अधिक लोगों के विकास के लिए हैं? दूसरा, क्या भारत रूस पर अपनी निर्भरता को 15% से नीचे ले जा सकता है? वर्तमान में, यह संभव नहीं लगता। तीसरा, क्या भारत अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी कार्रवाई करेगा? इससे एक व्यापार युद्ध शुरू हो सकता है, जो दोनों देशों के लिए हानिकारक होगा। जेलेंस्की ने अमेरिकी सीनेटरों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह एक न्यायपूर्ण प्रतिक्रिया है, लेकिन भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह न्याय महंगा पड़ सकता है। वाशिंगटन में बदलती परिस्थितियाँ और सीनेट का यह निर्णय भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई दिशा निर्धारित कर सकता है।