अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का नया 10% टैरिफ: भारत की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली में व्यापारिक हलचल
नई दिल्ली : वैश्विक व्यापार में एक बार फिर से हलचल मच गई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने टैरिफ आदेशों को 'अवैध' करार देते हुए उन्हें बड़ा झटका दिया। इसके तुरंत बाद, ट्रंप ने शनिवार को सभी आयातों पर 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की। भारत का वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय अब इन घटनाक्रमों का गहराई से विश्लेषण कर रहा है, ताकि भारतीय निर्यात पर इसके संभावित आर्थिक प्रभावों का आकलन किया जा सके।
10 प्रतिशत का नया टैरिफ
अमेरिकी सर्वोच्च अदालत ने ऐतिहासिक निर्णय में कहा कि ट्रंप ने पांच दशक पुराने आपातकालीन कानून का शांति काल में गलत इस्तेमाल किया। इससे भारत पर लागू 18 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ का कानूनी आधार समाप्त हो गया। हालांकि, ट्रंप ने हार नहीं मानी और ओवल ऑफिस से एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर गर्व से बताया कि अब अमेरिका में सभी देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लागू होगा।
ट्रंप का कानूनी आधार
ट्रंप ने अपने नए आदेश को कानूनी रूप देने के लिए 'सेक्शन 122' नामक एक कम चर्चित कानून का सहारा लिया है। यह कानून राष्ट्रपति को कांग्रेस की अनुमति के बिना 150 दिनों के लिए अधिकतम 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। नया 10 प्रतिशत शुल्क 24 फरवरी को भारतीय समयानुसार सुबह 10:31 बजे से लागू होगा। ट्रंप की इस त्वरित कार्रवाई ने वैश्विक व्यापारिक भागीदारों को सोचने का बहुत कम समय दिया है।
भारत सरकार की सतर्कता
भारत सरकार इस वैश्विक स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। वाणिज्य मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर रहे हैं। मंत्रालय के विशेषज्ञ यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि व्यापारिक नियमों में इस अचानक बदलाव से भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग उत्पादों की लागत पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सरकार फिलहाल 'रुको और देखो' की रणनीति अपनाते हुए अपने अगले कदमों का आकलन कर रही है।
टैरिफ में उतार-चढ़ाव
अदालती फैसले के तुरंत बाद यह उम्मीद जगी थी कि भारत पर टैरिफ घटकर केवल 3.5 प्रतिशत रह जाएगा, जो पहले 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' दर्जे के तहत लागू था। यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत हो सकती थी। लेकिन ट्रंप के नए 10 प्रतिशत आदेश ने इस राहत को अल्पकालिक बना दिया है। 18 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत होने की उम्मीद अब 10 प्रतिशत पर आकर टिक गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नई बहस
ट्रंप के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में नई बहस छेड़ दी है। चूंकि नए टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए प्रभावी हैं, उसके बाद ट्रंप को अमेरिकी कांग्रेस से इसकी औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। भारत के लिए मुख्य चुनौती यह है कि वह इस संक्रमण काल के दौरान अपने व्यापारिक हितों को कैसे सुरक्षित रखता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं का नया दौर शुरू हो सकता है ताकि भारतीय निर्यात को किसी भी बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।