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अशोक गहलोत ने भाजपा की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में स्थिति चिंताजनक है और लगातार घोटाले सामने आ रहे हैं। गहलोत ने रिफाइनरी के मुद्दे पर भी अपनी राय व्यक्त की, urging the government to review the situation thoroughly. उन्होंने राजनीति में आरोपों की गंभीरता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि जनता इस बार जवाब देगी। जानें गहलोत के विचार और भाजपा पर उनके आरोपों के बारे में।
 

गहलोत का भाजपा पर हमला

जोधपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां भी भाजपा की सरकार है, वहां स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।


गहलोत ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा शासित राज्यों में लगातार घोटाले सामने आ रहे हैं, लेकिन भाजपा के नेता इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। राजस्थान में गांवों से लेकर जयपुर तक लोग परेशान हैं और आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि हालात कितने गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि हमारी मुख्यमंत्री से कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर जा रही है।


रिफाइनरी पर गहलोत की प्रतिक्रिया

गहलोत ने राज्य में रिफाइनरी के आने पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि रिफाइनरी आ रही है, तो मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को वहां जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जब प्रधानमंत्री का दौरा हुआ था, तब आग लगने की घटना ने राजस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाया था। अब यदि रिफाइनरी लाने पर विचार हो रहा है, तो सरकार को स्थिति की पूरी समीक्षा करनी चाहिए।


राजनीति में आरोपों की गंभीरता

गहलोत ने कहा कि राजनीति में झूठे आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। यदि किसी के पास तथ्य हैं, तो उन्हें सामने लाना चाहिए। उन्होंने किरोड़ी लाल मीणा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लंबे समय से आरोप लगाते आ रहे हैं। पार्टी के अध्यक्ष पद की प्रतिष्ठा होती है, और ऐसे आरोपों का जवाब देना आवश्यक है।


उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीनस्थ अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं और यह स्थिति प्रदेश में पहले कभी नहीं देखी गई। गहलोत ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री को प्रदेश की स्थिति दिखाई नहीं दे रही है, जबकि जनता इस बार उन्हें जवाब देगी।


रिफाइनरी का इतिहास

गहलोत ने रिफाइनरी के मुद्दे पर कहा कि जब सोनिया गांधी चेयरपर्सन थीं और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने रिफाइनरी को सेंसन करवाने की कोशिश की थी। लेकिन पिछले पांच वर्षों से काम रोक दिया गया था, और भाजपा को यह बताना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ।