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असम में NEET पेपर लीक पर विरोध प्रदर्शन: मंत्री की बेटी का शामिल होना चर्चा का विषय

असम में NEET परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में मंत्री केशव महंता की बेटी दिबिसा का शामिल होना चर्चा का विषय बन गया है। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बच्चों की राजनीतिक सोच अलग हो सकती है और इसे सम्मानित किया जाना चाहिए। जानें इस विवाद पर और क्या कहा गया है और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं क्या हैं।
 

राजनीतिक घटनाक्रम का नया मोड़


NEET परीक्षा के पेपर लीक के विवाद के चलते देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, और इस बीच असम में एक नया राजनीतिक घटनाक्रम उभरा है। राज्य के मंत्री केशव महंता की बेटी दिबिसा ने छात्र प्रदर्शन में भाग लिया, जिससे यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। इस घटना ने राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

विरोध प्रदर्शनों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गए, जिनमें दिबिसा के प्रदर्शन में शामिल होने और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने का दावा किया गया। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। एक समाचार एजेंसी ने भी बताया कि वह वायरल क्लिप की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकी है। इसके बावजूद, वीडियो के आधार पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं.


मुख्यमंत्री सरमा का समर्थन

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी मंत्री को केवल इसलिए निशाना बनाना उचित नहीं है क्योंकि उसके बच्चे की राजनीतिक सोच अलग है। उन्होंने कहा कि यह संभव है कि बच्चे अपने माता-पिता की विचारधारा से असहमत हों और लोकतांत्रिक समाज में इस स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि केशव महंता को इस मामले में ट्रोल न किया जाए।


बच्चों की स्वतंत्रता का समर्थन

मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य में उनका बेटा भी किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष ले सकता है जिससे वह व्यक्तिगत रूप से सहमत न हों। उन्होंने कहा कि वयस्क होने के बाद बच्चों के विचारों को उनके माता-पिता की राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं माना जाना चाहिए। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा बताया गया।


नारों पर असहमति

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगली बार मुलाकात होने पर वह दिबिसा से इस विषय पर चर्चा करेंगे और अपनी बात समझाने का प्रयास करेंगे। इस बीच, असम के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशव महंता की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।