×

असम विधानसभा चुनाव: भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर

असम विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर की उम्मीद है। भाजपा 64 सीटें जीतने का लक्ष्य रखती है, जबकि कांग्रेस 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका और हिमंत बिस्वा सरमा की चिंताएँ चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। जानें दोनों दलों की स्थिति और चुनौतियाँ।
 

असम विधानसभा चुनाव की तैयारी

असम का विधानसभा चुनाव इस बार काफी रोचक होने वाला है। भाजपा के समर्थक यह दावा कर रहे हैं कि इस बार उन्हें पहले से अधिक सीटें मिलेंगी और वे अकेले 64 सीटें जीतकर बहुमत हासिल करेंगे। भाजपा 89 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसका मतलब है कि वे एक बड़ी जीत की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस 101 सीटों पर चुनाव में भाग ले रही है और पिछले 10 वर्षों के बाद उन्हें अपनी जीत की उम्मीद जगी है। भाजपा समर्थक कांग्रेस को सिंगल डिजिट में सीमित करने का दावा कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेता बहुमत की उम्मीद कर रहे हैं। इस स्थिति ने दोनों दलों के बड़े नेताओं को चिंतित कर दिया है।


प्रियंका गांधी की भूमिका

प्रियंका गांधी वाड्रा को असम में केवल टिकट वितरण की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अब कहा जा रहा है कि वे चुनाव की पूरी जिम्मेदारी ले रही हैं। कांग्रेस में इस पर चर्चा हो रही है कि प्रियंका को असम भेजा गया है क्योंकि वहां जीतने की संभावना कम है। यदि उनकी अगुवाई में कांग्रेस हारती है, तो उनके नेतृत्व पर सवाल उठ सकते हैं। प्रियंका और उनकी टीम की चिंता बढ़ रही है, खासकर जब से कई प्रमुख कांग्रेस नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। हाल ही में, कांग्रेस सांसद प्रद्योत बोरदोलोई ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है।


हिमंत बिस्वा सरमा की चिंताएं

हालांकि भाजपा की स्थिति मजबूत दिख रही है, लेकिन हिमंत बिस्वा सरमा भी चिंतित हैं। उनकी चिंता का कारण कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई हैं, जो चुनावी रणनीति में सक्रिय हैं। गोगोई ने जातीय समूहों पर ध्यान केंद्रित किया है और रायजोर दल के अखिल गोगोई को भी गठबंधन में शामिल किया है। इससे भाजपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, क्योंकि कई भाजपा नेता टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं। यह स्थिति भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है।


चुनाव की पृष्ठभूमि

हिमंत बिस्वा सरमा पहली बार अपने चेहरे पर चुनाव लड़ रहे हैं। 2016 में भाजपा ने कांग्रेस के 15 साल के शासन के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जबकि 2021 में चुनाव सर्बानंद सोनोवाल के चेहरे पर लड़ा गया था। अब, सरमा को 2024 में झारखंड में विधानसभा चुनाव के सह प्रभारी के रूप में भी चुनौती का सामना करना पड़ा था।