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असम विधानसभा चुनाव में भाजपा का नया गठबंधन: यूपीपीएल से दूरी

असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी सहयोगी पार्टी यूपीपीएल से दूरी बना ली है, जबकि प्रमोद बोडो ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। भाजपा को विश्वास है कि वह असम गण परिषद और बीपीएफ के साथ मिलकर बेहतर प्रदर्शन करेगी। जानें इस राजनीतिक बदलाव के पीछे की रणनीति और संभावित परिणाम।
 

भाजपा ने यूपीपीएल को किया अलग

असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी सहयोगी पार्टी यूपीपीएल से दूरी बना ली है। भाजपा के नेता प्रमोद बोडो ने राज्यसभा का चुनाव निर्विरोध जीतने के बावजूद, पार्टी ने उनके साथ कोई तालमेल नहीं रखा। भाजपा ने उन्हें अकेला छोड़ते हुए अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है, जिसमें उन्होंने सात नामों की घोषणा की है। हालांकि, भाजपा इस स्थिति को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है, क्योंकि उसे विश्वास है कि असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ मिलकर वह पहले से बेहतर प्रदर्शन करेगी। पार्टी को परिसीमन के जरिए विधानसभा सीटों में हुए बदलाव पर भरोसा है।


भाजपा ने पहले बीपीएफ के साथ गठबंधन किया था, लेकिन जब यूपीपीएल ने बोडोलैंड टेरिटोरियल कौंसिल (बीटीसी) के चुनाव में बीपीएफ को हराया, तो भाजपा ने बीपीएफ को छोड़कर यूपीपीएल से तालमेल कर लिया। हालांकि, बीटीसी के पिछले चुनाव में बीपीएफ ने फिर से यूपीपीएल को हराया, जिसके बाद भाजपा ने फिर से अपने गठबंधन को बदलते हुए यूपीपीएल को छोड़कर बीपीएफ के साथ हाथ मिलाया। इन दोनों पार्टियों का आधार बोडोलैंड क्षेत्र की 12 से 15 सीटों पर है। भाजपा को लगता है कि इस बार बीपीएफ और उसके नेता हाग्राम मोहिलारी की लहर चल रही है, जिससे प्रमोद बोडो को कोई खास सफलता नहीं मिलेगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि जब यूपीपीएल का गठबंधन भाजपा के साथ था, तब बीपीएफ ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। अब बीपीएफ और भाजपा एक साथ हैं, लेकिन कांग्रेस ने यूपीपीएल से गठबंधन नहीं किया है।