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असमय बारिश से प्रभावित किसानों के लिए राहत: गेहूं की खरीद में बदलाव

असमय बारिश से प्रभावित गेहूं की फसल को देखते हुए, सरकार ने किसानों के लिए राहत की घोषणा की है। रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं की खरीद अब लचीले मानकों के तहत की जाएगी, जिससे किसानों को नुकसान से बचाने का प्रयास किया जाएगा। लस्टर लॉस और टूटे दानों की स्वीकार्य सीमा बढ़ाई गई है, ताकि बारिश के कारण गुणवत्ता प्रभावित होने पर भी गेहूं खरीदा जा सके। इस निर्णय से लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
 

सरकार की नई नीति से किसानों को मिलेगी राहत

असमय हुई बारिश के कारण प्रभावित गेहूं की फसल को देखते हुए, सरकार ने किसानों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं की खरीद अब लचीले मानकों के तहत की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को नुकसान से बचाना और उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने से रोकना है।


गेहूं की गुणवत्ता मानकों में बदलाव

सरकार के निर्णय के अनुसार, अब प्रदेश में लस्टर लॉस (चमक में कमी) वाले गेहूं की स्वीकार्य सीमा को 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही, सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा, जो पहले 6 प्रतिशत थी, अब 20 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है। इससे बारिश के कारण गुणवत्ता में आई कमी के बावजूद किसानों का गेहूं खरीदा जा सकेगा।


खरीद प्रक्रिया और जिम्मेदारियाँ

शिथिल मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को सामान्य गेहूं से अलग रखा जाएगा और इसका अलग लेखा-जोखा रखा जाएगा। यह गेहूं केवल उत्तर प्रदेश के भीतर ही उपयोग किया जाएगा, ताकि गुणवत्ता प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि इस तरह खरीदे गए गेहूं के भंडारण के दौरान गुणवत्ता में गिरावट आती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। इसके अलावा, ऐसे गेहूं के स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी फसल हाल की बारिश से प्रभावित हुई है। सरकार का यह कदम किसानों के हितों की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।