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आईआईसी: एक ऐतिहासिक केंद्र की यात्रा और वर्तमान चुनौतियाँ

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) की स्थापना और विकास की कहानी एक दिलचस्प यात्रा है। मात्सुमोतो शिगेहारू के योगदान से लेकर रॉकफेलर के सहयोग तक, यह केंद्र वैश्विक संवाद को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था। वर्तमान में, आईआईसी की भूमि की कीमत 30 अरब रुपए है, लेकिन इसकी सदस्यता प्रक्रिया में कई चुनौतियाँ हैं। जानें कैसे यह केंद्र अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल हो रहा है और किन मुद्दों का सामना कर रहा है।
 

आईआईसी की संपत्ति और सदस्यता की चुनौतियाँ


वर्तमान में, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) की भूमि की कीमत 30 अरब रुपए आंकी गई है। इसमें लगभग चार हजार एसोसिएट सदस्यों में से कई की सदस्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, और करीब डेढ़ हजार अल्पकालिक सदस्यों की प्रोफाइल भी अस्पष्ट है। सदस्यता चयन प्रक्रिया पर पिछले कुछ वर्षों में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।


आईआईसी के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में सात मुख्य सदस्य होते हैं, जिनमें से पांच की नियुक्ति जीवनभर के लिए होती है। ये सदस्य तब तक बने रहते हैं जब तक वे स्वयं इस्तीफा नहीं देते या उनका निधन नहीं होता।


मात्सुमोतो शिगेहारू का योगदान

जापानी पत्रकार मात्सुमोतो शिगेहारू ने टोक्यो विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और आगे की शिक्षा के लिए अमेरिका गए। 1930 के दशक में, जब जापान और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा था, उन्हें शंघाई भेजा गया। मात्सुमोतो ने शीआन हादसे की पहली खबर दी, जिससे वे विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हो गए।


दूसरे विश्वयुद्ध के बाद, जापान को वैश्विक समुदाय से फिर से जोड़ने की आवश्यकता महसूस हुई। मात्सुमोतो ने रॉकफेलर के साथ मिलकर 1952 में टोक्यो में इंटरनेशनल हाउस ऑफ जापान की स्थापना की, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देना था।


आईआईसी की स्थापना और विकास

रॉकफेलर के भारत दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने आईआईसी की स्थापना का विचार रखा। प्रधानमंत्री नेहरू ने इसके लिए लोधी गार्डन के पास भूमि आरक्षित की। 1962 में, राधाकृष्णन ने आईआईसी का उद्घाटन किया।


सी. डी. देशमुख को इस केंद्र का आजीवन अध्यक्ष बनाया गया। आईआईसी के निर्माण में रॉकफेलर फाउंडेशन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।


आईआईसी का वर्तमान और भविष्य

आईआईसी में लगभग 8,000 सदस्य हैं, जिनमें से 2,082 व्यक्तिगत सदस्य हैं। इसके अलावा, 168 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं और अनुसंधान केंद्र भी इसके संस्थागत सदस्य हैं।


हालांकि, आईआईसी की सदस्यता प्रक्रिया में विवाद और चुनौतियाँ बनी हुई हैं। 2006 में, लालू प्रसाद यादव की सदस्यता को लेकर विवाद हुआ था, जब उन्हें सदस्यता नहीं दी गई।


आईआईसी को अपनी संचालन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।