☰
×

आईआरडीएआई के नए नियमों से बीमा क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने नए नियमों का प्रस्ताव रखा है, जो भारत के बीमा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य पॉलिसीधारकों के लिए लागत को कम करना और पारदर्शिता को बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्राहकों को लाभ होगा, लेकिन वितरकों के लाभ पर दबाव भी पड़ेगा। जानें कैसे ये नए नियम बीमा वितरण प्रणाली को प्रभावित करेंगे और ग्राहकों के लिए क्या नया लाएंगे।
 

नई दिल्ली में बीमा क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव

नई दिल्ली: बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा सुझाए गए नए नियमों से भारत के बीमा क्षेत्र में महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बीमा उद्योग में उत्पादों के अनुसार कमीशन की नई सीमा लागू हो सकती है।


आईआरडीएआई ने बीमा वितरण प्रणाली में सुधार के लिए एक सरल तीन-स्तरीय ढांचे का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य पॉलिसीधारकों के लिए लागत को कम करना, पारदर्शिता को बढ़ाना और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत करना है।


विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम ग्राहकों के लिए फायदेमंद होगा, लेकिन इससे बैंक-बीमा साझेदारों और एनबीएफसी जैसे वितरकों के लाभ पर दबाव भी पड़ेगा।


डेलॉइट इंडिया के पार्टनर देबाशीष बनर्जी ने कहा, "इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य डिजिटल तरीकों को अपनाना और एक ऐसा स्थायी बाजार बनाना है जो ग्राहकों को प्राथमिकता दे। यह बदलाव कंपनियों को नए विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।"


आईआरडीएआई के कंसल्टेशन पेपर में नए वाहनों के मोटर बीमा के लिए कमीशन की सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है। इसमें थर्ड-पार्टी प्रीमियम के लिए भुगतान को शून्य और खुद के नुकसान के लिए 5 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव है।


इससे "टेक्नोलॉजी, जागरूकता और संबंधित खर्च" भी कमीशन की सीमा में शामिल होंगे, और मौजूदा मोटर बीमा सेवा प्रदाता प्रणाली की जगह एक व्यापक बीमा वितरण प्रणाली स्थापित की जाएगी।


शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर शैलजा लाल ने कहा, "इन परिवर्तनों का प्रभाव ऑटोमोबाइल डीलरों, ओईएम से जुड़े ब्रोकरों और बीमा कंपनियों पर पड़ेगा। नई गाड़ियों की पॉलिसी से होने वाली प्रारंभिक कमाई में कमी आएगी।"


इन प्रस्तावों का उद्देश्य बीमा बिक्री को डीलरों के अन्य संबंधों से अलग करना है। डीलरों को ग्राहकों को बीमा के वैकल्पिक डिजिटल चैनलों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने की आवश्यकता होगी।


लाल ने कहा, "इन सुधारों से पारंपरिक डीलर-आधारित मॉडल में बदलाव आ सकता है, जिसमें बीमा की बिक्री और गाड़ी की फाइनेंसिंग आपस में जुड़ी होती हैं।"


हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आईआरडीएआई कौन से नियम अपनाता है और उनका कार्यान्वयन कैसे किया जाता है।


कंसल्टेशन पेपर में सभी प्रकार के सामान्य बीमा कमीशन पर सीमा लगाने का प्रस्ताव है। इसमें स्वास्थ्य बीमा के लिए पहले बार के कमीशन को 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच तय करने का सुझाव दिया गया है।


ड्राफ्ट पेपर में वितरण संस्थाओं के लिए पहले वर्ष के कमीशन को 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच सीमित किया गया है, जो पहले मिलने वाले प्रभावी भुगतान से कम है।