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आजम खान की मुश्किलें बढ़ीं, ईडी ने दर्ज की FIR

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जब प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ FIR दर्ज की। जौहर विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये के गबन और धोखाधड़ी के मामले में आजम खान और उनके रिश्तेदारों पर कार्रवाई की जा रही है। FIR में आरोप है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है, और कई धाराओं के तहत सजा का प्रावधान है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई।
 

रामपुर में आजम खान के खिलाफ कार्रवाई


रामपुर। जौहर विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये के अनियमित खर्च और घोटाले के मामले में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें गंभीर धाराएं शामिल हैं, जिनमें आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। इन धाराओं के तहत पुलिस को आरोपियों को गिरफ्तार करने का अधिकार भी है।


मंगलवार को अजीमनगर थाने में ईडी द्वारा आजम खान, मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, एसएस एंड एस इंटरप्राइजेज, एसएस एसोसिएट और अन्य के खिलाफ सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले की जांच सीओ टांडा पंकज पंत कर रहे हैं। अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


वकील संदीप सक्सेना के अनुसार, ईडी द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 'आपराधिक साजिश' से संबंधित है। इस धारा के तहत सजा का निर्धारण अपराध की गंभीरता पर निर्भर करता है। बीएनएस की धारा 316(5) के अनुसार, यदि कोई लोक सेवक, बैंकर, व्यापारी, दलाल या अभिकर्ता अपने व्यवसाय के दौरान सौंपी गई संपत्ति का आपराधिक विश्वासघात करता है, तो उसे 10 साल या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।


इसी प्रकार, बीएनएस की धारा 318(4) धोखाधड़ी और संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को बेईमानी से हड़पने से संबंधित है, जिसमें सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की तीन धाराएं भी आरोपित की गई हैं। इनमें से धारा 7 लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेने या अनुचित लाभ प्राप्त करने से संबंधित है, जिसमें सात वर्ष तक की सजा हो सकती है।


धारा 13 (2) लोक सेवक द्वारा किए जाने वाले 'आपराधिक अवचार' के लिए है, जिसमें कम से कम 4 वर्ष की जेल का प्रावधान है, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह, धारा 13 (1) (d) के तहत यदि कोई लोक सेवक अपने कार्यकाल के दौरान बेईमानी से अवैध रूप से खुद को समृद्ध करता है, तो उसे दस वर्ष की सजा हो सकती है। सात वर्ष से अधिक की सजा वाले मामलों में पुलिस को आरोपितों को गिरफ्तार करने का अधिकार है। हालांकि, जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर धाराएं कम या बढ़ भी सकती हैं।


प्राथमिकी में आरोप


प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय परिसर में 85.81 करोड़ रुपये के कार्य सरकारी धन से कराए गए। विश्वविद्यालय के निर्माण की कुल लागत 494.46 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2024-25 तक 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दर्शाया गया है। इस प्रकार, करीब 416.14 करोड़ रुपये के अंतर का स्पष्टीकरण नहीं मिलने का दावा किया गया है।


ईडी ने सरकारी धन से विश्वविद्यालय परिसर में काम कराए जाने के आरोपों के तहत तीन मदों का उल्लेख किया है। एक ठेकेदार के बयान में सरकारी ठेकों से जुड़े 55.8 करोड़ रुपये की निर्माण सामग्री विश्वविद्यालय के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा, भव्य पंडाल, छात्रावास और अस्पताल के लिए 23.41 करोड़ रुपये की सरकारी मंजूरी का जिक्र किया गया है। यह भी कहा गया है कि विधायक/एमएलसी क्षेत्र विकास निधि से विश्वविद्यालय परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के काम कराए गए।