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आप का मनरेगा योजना के खिलाफ प्रदर्शन, मोदी का पुतला जलाया

आम आदमी पार्टी ने नाभा में मनरेगा योजना के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी का पुतला जलाया गया। विधायक गुरदेव सिंह देव मान ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह गरीबों की आजीविका छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मनरेगा के फंडिंग में बदलाव को संघवाद विरोधी बताया और कहा कि पंजाब विधानसभा ने केंद्र से मांग की है कि मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। पार्टी ने पूरे पंजाब में प्रदर्शनों की योजना बनाई है। जानें इस आंदोलन के पीछे की पूरी कहानी।
 

आप का विरोध प्रदर्शन

नाभा: आम आदमी पार्टी (आप) ने गुरुवार को नाभा के पटियाला गेट पर केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना को समाप्त करने के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान आप विधायक गुरदेव सिंह देव मान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा का नाम बदल सकती है, लेकिन इसकी नीति और उद्देश्य में बदलाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मनरेगा की आत्मा को ही बदल दिया है, और नई नीतियों का उद्देश्य गरीबों को दबाना और उनकी आजीविका छीनना है।


विधायक ने केंद्र के निर्णय का विरोध किया, जिसमें मनरेगा फंडिंग का 40 प्रतिशत बोझ राज्यों पर डालने का प्रस्ताव था। इसे उन्होंने 'गैर-वाजिब और संघवाद विरोधी' करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य इस अतिरिक्त बोझ को कैसे संभालेंगे, यह संघीय ढांचे पर सीधा हमला है और कल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब विधानसभा ने केंद्र से मांग की है कि मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए और गरीब विरोधी बदलाव वापस लिए जाएं।


आप अनुसूचित जाति शाखा के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी ने कहा कि पार्टी मनरेगा के समर्थन में प्रदेशव्यापी प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही है। उन्होंने बताया कि आप पूरे पंजाब में प्रदर्शन कर रही है, जिसमें कल जालंधर और आज नाभा में प्रदर्शन किया गया। उन्होंने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर किसानों, मजदूरों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर हमले करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले किसानों पर तीन काले कृषि कानून थोपे गए, फिर संविधान को कमजोर करने की कोशिशें हुईं। अब मनरेगा के नए कानूनों से कामकाजी महिलाओं और गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक केंद्र बदलाव वापस नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।