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आरएसएस और भाजपा के संबंधों पर बीएल संतोष का स्पष्ट दृष्टिकोण

बीएल संतोष ने आरएसएस और भाजपा के संबंधों पर एक महत्वपूर्ण साक्षात्कार में कई भ्रांतियों को दूर किया है। उन्होंने बताया कि भाजपा की निर्णय प्रक्रिया स्वतंत्र है और आरएसएस से प्रेरणा लेती है। इस साक्षात्कार में संगठन के विस्तार, सत्ता और विचारधारा के संतुलन पर भी चर्चा की गई है। जानें इस साक्षात्कार के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।
 

आरएसएस और भाजपा की समझ

आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी को सही तरीके से समझने के लिए उनके बीच के संबंधों की बारीकियों को जानना आवश्यक है। संघ प्रमुख ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया है, जबकि संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। इससे आरएसएस और भाजपा को समझने का दृष्टिकोण स्पष्ट होगा।


आरएसएस की स्थापना का शताब्दी वर्ष

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के एक सौ वर्ष पूरे होने का अवसर न केवल इसके विचारों के प्रसार का है, बल्कि इसके बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करने का भी है। मोहन भागवत विभिन्न क्षेत्रों में व्याख्यानों के माध्यम से संघ के उद्देश्यों और भाजपा के साथ संबंधों को स्पष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस को भाजपा के दृष्टिकोण से देखना गलत है।


संगठन महामंत्री का साक्षात्कार

बीएल संतोष ने संघ और भाजपा के संबंधों पर एक महत्वपूर्ण साक्षात्कार में कई मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भाजपा अपने निर्णयों में आरएसएस से सलाह लेती है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा की निर्णय प्रक्रिया स्वतंत्र है। उन्होंने संघ को भाजपा का 'मायका' बताया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आरएसएस से भाजपा को प्रेरणा मिलती है।


निर्णय प्रक्रिया की लोकतांत्रिकता

संतोष ने भाजपा की निर्णय प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बताया। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे एक छोटे निर्णय के लिए भी कई लोगों से विचार-विमर्श किया जाता है। यह दर्शाता है कि भाजपा में निर्णय लेने की प्रक्रिया कितनी विकेंद्रित है।


सत्ता और विचारधारा का संतुलन

संतोष ने यह भी कहा कि भाजपा का उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना है, लेकिन यह विचारधारा के मूल से समझौता किए बिना होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि सत्ता के बिना कई संवैधानिक खामियों को ठीक नहीं किया जा सकता।


भाजपा का संगठन विस्तार

संतोष ने भाजपा के संगठन विस्तार के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पार्टी ने 14 करोड़ सदस्य बनाए हैं, जो कि पार्टी के कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है।


भ्रांतियों का समाधान

आरएसएस और भाजपा के संबंधों को समझने के लिए इन सभी बारीकियों को जानना आवश्यक है। संघ प्रमुख और बीएल संतोष के प्रयासों से उम्मीद है कि भ्रांतियों का समाधान होगा।