इजराइल चुनाव: नेतन्याहू और आइजनकोट के बीच बहुमत की जंग
इजराइल में चुनाव परिणाम
27 अक्टूबर को इजराइल में चुनाव संपन्न हुए, और अब मतगणना भी पूरी हो चुकी है। इजराइल के राजनीतिक इतिहास में यह देखा गया है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं हुआ है, और इस बार भी यही स्थिति बनी रही। न तो नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत हासिल कर सका और न ही उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी आइजनकोट की पार्टी। हालांकि, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने सबसे अधिक सीटें जीती हैं।
गठबंधन की चुनौतियाँ
नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि इजराइल की संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है। नेतन्याहू के पास दो विकल्प हैं: वह किसी मुस्लिम पार्टी का समर्थन ले सकते हैं, जिसमें चार पार्टियाँ शामिल हैं, जिनके पास कुल 19 सीटें हैं। इनमें से एक पार्टी ने 6, दूसरी ने 7 और तीसरी ने 12 सीटें जीती हैं। हालांकि, नेतन्याहू और आइजनकोट दोनों ने मुस्लिम पार्टियों के साथ जाने से इनकार किया है।
संभावित गठबंधन और रणनीतियाँ
यदि नेतन्याहू मुस्लिम पार्टी के साथ गठबंधन करते हैं, तो उन्हें फिलिस्तीन के मुद्दे पर नरमी दिखानी पड़ सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि नेतन्याहू की सफलता में उनका समर्थन महत्वपूर्ण था। नेतन्याहू और आइजनकोट मिलकर सरकार बनाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं, हालांकि आइजनकोट ने नेतन्याहू की नीतियों के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
आइजनकोट की भूमिका
आइजनकोट, जो पूर्व सेना प्रमुख रह चुके हैं, ने चुनाव में नेतन्याहू के खिलाफ अपनी स्थिति बनाई है। दोनों नेताओं की विचारधारा में समानता है, खासकर ईरान के परमाणु हथियारों के खतरे को लेकर। 7 अक्टूबर 2023 को हुई घटना में आइजनकोट का बेटा भी मारा गया था, जिससे उनकी नीति और भी सख्त हो गई है। यदि दोनों गठबंधन करते हैं, तो प्रधानमंत्री बनने की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है।