इजराइल में अरब पार्टियों की बढ़ती भूमिका: एक नई राजनीतिक दिशा
इजराइल की राजनीतिक स्थिति में बदलाव
दुनिया भर में एक कट्टर यहूदी राष्ट्र के रूप में पहचाने जाने वाले इजराइल ने अब अपनी राजनीतिक दिशा उन अरब पार्टियों की ओर मोड़ने का निर्णय लिया है, जिन्हें पहले मुख्यधारा में नहीं माना जाता था। अक्टूबर 2026 के इजराइली संसदीय चुनावों के परिणामों ने न केवल इजराइल बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया। 120 सीटों वाली इस संसद में न तो बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन बहुमत हासिल कर सका और न ही विपक्ष के नेता गदी आइजेनकोर्ट का मध्यम मार्गी समूह। इस त्रिशंकु संसद ने एक नई सच्चाई को उजागर किया है, जिसमें अरब पार्टियां अब किंग मेकर बन गई हैं।
सबसे बड़ा राजनीतिक हलचल तब हुई जब विपक्ष के यहूदी नेता गदी आइजेनकोर्ट ने परंपराओं को तोड़ते हुए अरब नेताओं से मुलाकात की। यह मुलाकात चुनाव परिणामों के तुरंत बाद हुई। गदी आइजेनकोर्ट, जो इजराइल के पूर्व सैन्य प्रमुख रह चुके हैं, ने अरब नेताओं के साथ हाथ मिलाया। इतिहास बताता है कि इजराइल की मुख्यधारा की यहूदी पार्टियां हमेशा अरब पार्टियों को नॉन-जायनिस्ट मानकर उन्हें सत्ता से दूर रखती आई हैं। उन्हें यह डर था कि अरब पार्टियों को शामिल करने से देश की सुरक्षा और खुफिया निर्णयों पर असर पड़ सकता है.
सुरक्षा और पहचान पर सवाल
2026 के चुनाव परिणामों ने इस दीवार को तोड़ दिया है। गदी आइजेनकोर्ट के गुट ने अरब नेताओं को महत्व दिया, जिससे दक्षिणपंथी खेमे में हड़कंप मच गया। दक्षिणपंथी नेताओं का आरोप है कि सत्ता की लालसा में यहूदी गुट उन ताकतों के सामने झुक रहे हैं, जो इजराइल को एक शुद्ध यहूदी राष्ट्र के रूप में नहीं देखना चाहतीं। लेकिन क्या यह केवल एक गठबंधन की मजबूरी है या इजराइल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत? नेतन्याहू के खेमे ने इस मुलाकात को इजराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा और यहूदी पहचान के साथ विश्वासघात करार दिया है।
उनके सहयोगियों का कहना है कि एक ऐसी सरकार जो अरब पार्टियों पर निर्भर करेगी, जो इजराइल की सुरक्षा और सुरक्षा बलों के अभियानों का विरोध करती हैं, वह देश की संप्रभुता की रक्षा कैसे कर सकती है? विपक्ष के नेता गदी आइजेनकोर्ट ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
अरब नेताओं की प्रतिक्रिया
इजराइल एक यहूदी और लोकतांत्रिक देश है, और इसके अरब नागरिक भी इस देश का हिस्सा हैं। संसद में उनके प्रतिनिधियों से संवाद करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अरब गुट की ओर से मंसूर अब्बास और अन्य नेताओं ने भी बयान दिए हैं। उनका रुख इस बार बेहद रणनीतिक और डिप्लोमैटिक है। राअम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य इजराइल को समाप्त करना नहीं है, बल्कि इजराइल में रहने वाले 22% अरब नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
वे किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को बजट, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और नागरिक अधिकारों के मुद्दों पर समर्थन देने के लिए तैयार हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों और इजरायली राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के तीन दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। यहूदी और लोकतांत्रिक संतुलन में बदलाव, जो इजराइल के यहूदी चरित्र को लोकतांत्रिक चरित्र पर प्राथमिकता देने की आवश्यकता को दर्शाता है।