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इज़रायल का ईरान के साथ सीज़फ़ायर पर समर्थन, लेकिन हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सतर्कता बरकरार

इज़रायल ने अमेरिका के साथ ईरान के अस्थायी सीज़फ़ायर का समर्थन किया है, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि यह समर्थन हिज़्बुल्लाह के खिलाफ उनकी सैन्य नीति को प्रभावित नहीं करेगा। नेतन्याहू ने ईरान के साथ समझौते की शर्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि इज़रायल अपनी उत्तरी सीमा पर सतर्कता बनाए रखेगा। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि इज़रायल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और ईरान के साथ शांति की आड़ में हिज़्बुल्लाह को मजबूत नहीं होने देगा।
 

इज़रायल का ईरान के साथ सीज़फ़ायर पर रुख

इज़रायल ने अमेरिका के साथ ईरान के अस्थायी सीज़फ़ायर का समर्थन किया है, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता लेबनान में हिज़्बुल्लाह के साथ चल रहे संघर्ष को नहीं कवर करता। बुधवार को जारी एक बयान में, नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि इज़रायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस निर्णय का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने ईरान पर हमले दो हफ्तों के लिए रोकने का फैसला किया है। यह रोक इस शर्त पर है कि ईरान तुरंत होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोले और अमेरिका, इज़रायल तथा क्षेत्र के अन्य देशों पर होने वाले सभी हमलों को रोके। इस बयान में वाशिंगटन के प्रयासों के प्रति इज़रायल के समर्थन पर भी जोर दिया गया है, जिसका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है।


इज़रायल का समर्थन और शर्तें

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि इज़रायल, राष्ट्रपति ट्रंप के साहसिक निर्णय का स्वागत करता है जिसमें ईरान पर हमले रोकने की बात कही गई है। इज़रायल का यह समर्थन कुछ शर्तों पर आधारित है:


1. होर्मुज़ जलडमरूमध्य का खुलना: ईरान को तुरंत और सुरक्षित रूप से इस जलमार्ग को बहाल करना होगा।


2. हमलों पर पूर्ण रोक: ईरान को अमेरिका, इज़रायल और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों पर होने वाले सभी हमलों को रोकना होगा।


3. परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम: इज़रायल उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो ईरान को परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता हासिल करने से रोकते हैं।


हिज़्बुल्लाह पर इज़रायल का रुख

नेतन्याहू ने यह स्पष्ट किया कि ईरान के साथ हुए इस समझौते को इज़रायल की उत्तरी सीमा पर कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।


इज़रायल ने कहा है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ उसकी सैन्य नीति स्वतंत्र रहेगी।


प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि यदि हिज़्बुल्लाह की ओर से कोई उकसावे की कार्रवाई होती है, तो इज़रायल जवाब देने के लिए स्वतंत्र है।


इज़रायल का तर्क है कि हिज़्बुल्लाह के साथ उसका संघर्ष स्थानीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ा है, जो ईरान-अमेरिका के व्यापक समझौतों के दायरे में नहीं आता।


क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

नेतन्याहू का यह बयान वैश्विक तेल आपूर्ति और बड़े युद्ध के खतरे को टालने में मदद करता है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव की जटिलता को भी दर्शाता है। इज़रायल का रुख यह सुनिश्चित करने के लिए है कि ईरान के साथ शांति की आड़ में उसके प्रॉक्सी संगठन (जैसे हिज़्बुल्लाह) को फिर से संगठित होने का मौका न मिले।


प्रधानमंत्री कार्यालय का संदेश: "हम क्षेत्र में शांति के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों का समर्थन करते हैं, लेकिन इज़रायल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हमारी उत्तरी सीमा पर हिज़्बुल्लाह के खिलाफ हमारी रणनीति यथावत रहेगी।"