ईरान और अमेरिका के बीच तनाव: इतिहास और वर्तमान परिप्रेक्ष्य
इस लेख में ईरान और अमेरिका के बीच के तनाव का इतिहास प्रस्तुत किया गया है। 1979 के एम्बेसी हमले से लेकर कासिम सुलेमानी की हत्या तक, यह लेख उन घटनाओं का विश्लेषण करता है जिन्होंने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया। जानें कि कैसे ये घटनाएँ आज के राजनीतिक परिदृश्य को आकार दे रही हैं और ईरान का वैश्विक प्रभाव क्या है।
Feb 23, 2026, 20:08 IST
ईरान का वैश्विक प्रभाव और अमेरिका के साथ संबंध
मीडिल ईस्ट में कई देश हैं, लेकिन ईरान का नाम अक्सर सुना जाता है। ईरान का समर्थन हिजबुल्ला, हमास और हूती जैसे समूहों को मिलता है, और वह इजरायल को लगातार चुनौती दे रहा है। यह सवाल उठता है कि ईरान को इन समूहों के साथ खड़ा होने का क्या लाभ है, जबकि वह पूरी दुनिया के खिलाफ जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संबंध कभी अच्छे थे, लेकिन अब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाकर उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है, फिर भी ईरान अमेरिका के खिलाफ खड़ा है।
1979 का अमेरिकी एम्बेसी हमला
1979 में ईरानी क्रांति के दौरान, 4 नवंबर को तेहरान की अमेरिकी एम्बेसी पर हमला हुआ, जिसमें 63 लोगों को बंधक बना लिया गया। छात्रों ने बंधकों के बदले अमेरिका से शाह को लौटाने की मांग की। अमेरिका ने जवाब में ईरान की संपत्ति को जब्त कर लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बंधकों को छुड़ाने के लिए एक सैन्य ऑपरेशन की योजना बनाई, लेकिन यह असफल रहा। इस घटना के बाद से अमेरिका और ईरान के रिश्ते कभी सामान्य नहीं हो पाए।
न्यूक्लियर डील और उसके परिणाम
2015 में, ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ एक न्यूक्लियर डील पर हस्ताक्षर किए, जिसे P5+1 समझौते के रूप में जाना जाता है। लेकिन 2018 में, ट्रंप ने इस डील से अमेरिका को बाहर कर लिया, यह कहते हुए कि ईरान क्षेत्र में अशांति का कारण है। इसके बाद, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रमों पर लगे प्रतिबंधों का पालन करना बंद कर दिया।
कासिम सुलेमानी की हत्या और उसके प्रभाव
8 जनवरी 2020 को, ट्रंप ने ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी को एक अमेरिकी हवाई हमले में मार डाला। सुलेमानी ईरान के लिए पश्चिम एशिया में महत्वपूर्ण मिशनों का संचालन करते थे। उनकी हत्या ने ईरान को गहरा आघात पहुँचाया और अमेरिका के साथ संबंधों को और बिगाड़ दिया। ट्रंप ने कहा कि सुलेमानी अमेरिका के खिलाफ हमले की योजना बना रहे थे।