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ईरान और अमेरिका के बीच संभावित वार्ता: इजरायल की भूमिका पर शर्तें

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है। ईरान के फर्स्ट उपराष्ट्रपति ने कहा है कि समझौता संभव है, लेकिन यह इजरायल की भागीदारी पर निर्भर करेगा। ईरान के विदेश मंत्री ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के प्रति जिम्मेदार रुख अपनाएं। जानें इस वार्ता का क्षेत्रीय स्थिरता पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता की तैयारी

नई दिल्ली - अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में वार्ता का आयोजन होने जा रहा है। पश्चिम एशिया में एक महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष और होर्मुज संकट के बाद, इस वार्ता पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है। ईरान के फर्स्ट उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने कहा है कि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की संभावना है, लेकिन यह इजरायल की भागीदारी पर निर्भर करेगा।


अरेफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "यदि हम इस्लामाबाद में 'अमेरिका फर्स्ट' के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हैं, तो दोनों पक्षों और वैश्विक समुदाय के लिए लाभकारी समझौता संभव है। लेकिन, यदि हमारा सामना 'इजरायल फर्स्ट' के प्रतिनिधियों से होता है, तो कोई डील नहीं होगी; हम अपने बचाव को और मजबूत करेंगे और दुनिया को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।"


ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, अमेरिका के साथ बातचीत से पहले, ईरान के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की है। इस बैठक के बाद ईरान-अमेरिका वार्ता के लिए प्रारूप तय किए जाएंगे।


ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे ईरान पर कथित अमेरिकी-इजरायली हमलों के प्रति जिम्मेदार रुख अपनाएं। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ टेलीफोन वार्ता में, अराघची ने ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य घटनाक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की सलाह दी।


अराघची ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान ने संघर्ष समाप्त करने और हमलावरों को जवाबदेह ठहराने की शर्तों पर सीजफायर स्वीकार किया है, जिसे एक "जिम्मेदार कदम" बताया गया है।


जर्मनी के विदेश मंत्री वाडेफुल ने भी युद्ध समाप्ति का समर्थन किया और लेबनान में इजरायली हमलों को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों के बीच प्रस्तावित वार्ता क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने में सहायक होगी।