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ईरान और अमेरिका के बीच समझौता: अंतिम क्षणों में विफलता के कारण

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता अंतिम क्षणों में विफल हो गया। इस्लामाबाद में हुई उच्च-स्तरीय बैठक के बाद, उन्होंने कहा कि अतिरिक्त मांगों और बदलते रुख के कारण बातचीत सफल नहीं हो सकी। ईरान के राष्ट्रपति ने भी समझौते की संभावना को खत्म नहीं माना है। जानें इस वार्ता के पीछे की पूरी कहानी और भविष्य की संभावनाएं।
 

समझौते की नजदीकी और विफलता

तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 13 अप्रैल को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता “बस कुछ इंच दूर” था। लेकिन अंतिम क्षणों में अतिरिक्त मांगों, बदलते रुख और रुकावटों के कारण बातचीत सफल नहीं हो सकी। यह बयान इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक के एक दिन बाद आया, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव को कम करना और स्थायी समाधान खोजना था, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।


अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ईरान ने लगभग 50 वर्षों में पहली बार अमेरिका के साथ “युद्ध समाप्त करने के नेक इरादे” से बातचीत की। उन्होंने कहा, “जब हम ‘इस्लामाबाद MoU’ के बेहद करीब थे, तभी हमें अत्यधिक मांगों, बदलते लक्ष्यों और रुकावटों का सामना करना पड़ा।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन मुद्दों पर सहमति बनने में बाधा आई।


इससे पहले, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी यह संकेत दिया था कि समझौते की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका “अपनी तानाशाही नीति छोड़कर” ईरान के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते का रास्ता खुल सकता है।


ईरानी संसद के स्पीकर एम.के. गालिबफ ने कहा कि ईरान समझौते की मंशा से बातचीत में शामिल हुआ था, लेकिन उसे दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं था। उनके अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भविष्य-उन्मुख प्रस्ताव रखे, लेकिन अमेरिकी पक्ष विश्वास जीतने में असफल रहा। कुल मिलाकर, इस्लामाबाद में हुई यह महत्वपूर्ण वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गई, हालांकि दोनों पक्षों ने आगे बातचीत की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है।