ईरान का अमेरिका समर्थित ठिकानों पर हमला: आत्मरक्षा की मजबूरी
ईरान की आत्मरक्षा के कदम
ईरान ने अपनी सुरक्षा के लिए उठाए कदम, अमेरिका के ठिकानों पर हमले की प्राथमिकता
नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों को अपनी मजबूरी बताया है। ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ये हमले आत्मरक्षा के उपाय हैं, ताकि अमेरिका समर्थित ठिकानों से होने वाले हमलों को रोका जा सके।
इलाही ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के इस दावे को खारिज किया कि ईरान संघर्ष बढ़ने के बीच वार्ता के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया है, लेकिन अपनी गरिमा और भूमि की रक्षा के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अमेरिका के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है और जरूरत पड़ने पर पांच साल तक युद्ध लड़ने को भी तैयार है।
अमेरिका के सैन्य ठिकानों की संख्या
अमेरिका ने खाड़ी में बनाए 45 सैन्य अड्डे
इलाही ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के आसपास 33 से 45 सैन्य अड्डे स्थापित किए हैं, जिनका उपयोग तेहरान के खिलाफ किया जा रहा है। ईरान ने अपने पड़ोसियों से अनुरोध किया था कि वे इन ठिकानों का उपयोग ईरान के खिलाफ हमले के लिए न करें, लेकिन हमले जारी रहे।
ऊर्जा संकट और लोगों की पीड़ा
ऊर्जा संकट से जनता को हो रही दिक्कत
इलाही ने कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के कारण ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे लोगों को गैस, पेट्रोल और तेल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी रक्षा करनी होगी और इस स्थिति से कोई खुशी नहीं है।
उन्होंने वैश्विक नेताओं से अमेरिका पर युद्ध रोकने के लिए दबाव डालने का आग्रह किया।
ईरान की स्थिति स्पष्ट
हम खून बहाने के लिए तैयार, लेकिन जमीन नहीं देंगे
इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं है, हालांकि वे अपनी रक्षा के लिए खून बहाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ईरान इस समय अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहता क्योंकि अमेरिका ने ही यह युद्ध शुरू किया है।