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उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव की घोषणा

निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की राज्यसभा की 12 सीटों के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच दिलचस्प मुकाबला होने की संभावना है। इस चुनाव के बाद बसपा का संसद में कोई प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। जानें और क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं और चुनाव की प्रक्रिया के बारे में।
 

राज्यसभा चुनाव की तैयारी


निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की राज्यसभा की 12 सीटों के लिए चुनाव की तारीख घोषित की है। उत्तर प्रदेश में सबसे दिलचस्प मुकाबला होने की संभावना है, जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 10 में से 8 सीटें बरकरार रख सकती है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) को एक सीट का लाभ मिल सकता है।


इन 12 सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होगा। भाजपा की राज्यसभा में एक सीट बढ़ने की संभावना है।


पश्चिम बंगाल की एकमात्र सीट भाजपा के खाते में जाने की उम्मीद है। यह सीट अभिनेत्री रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। रुक्मिणी को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राज्यसभा भेजा था, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।


उत्तर प्रदेश में विधानसभा में मौजूदा दलगत स्थिति के अनुसार, भाजपा नीत गठबंधन के 8 सीटें बरकरार रखने की संभावना है, जबकि सपा की संख्या बढ़कर 2 होने की उम्मीद है।


इस चुनाव के बाद मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का संसद में कोई प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। पार्टी का लोकसभा में कोई सदस्य नहीं है और हाल ही में अपने एकमात्र उत्तर प्रदेश विधायक के निधन के बाद विधानसभा में भी उसका एकमात्र सदस्य खो गया।


बसपा के एकमात्र राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है।


गौतम के अलावा, उत्तर प्रदेश से जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बी.एल. वर्मा और सीमा द्विवेदी तथा सपा महासचिव राम गोपाल यादव शामिल हैं।


पुरी का केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि भाजपा उन्हें एक और कार्यकाल के लिए फिर से नामित करती है या नहीं।


उत्तर प्रदेश की रिक्त होने वाली दसवीं सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के पास थी। यह सीट हाल ही में खाली हुई, जब उन्हें अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया।


बसपा ने 2020 में गौतम को राज्यसभा भेजने में सफलता हासिल की थी, जब भाजपा ने 10 सीटों के लिए केवल 8 उम्मीदवार उतारे थे। इससे बसपा और सपा दोनों को एक-एक सदस्य निर्विरोध निर्वाचित कराने का मौका मिला था।


गौतम निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इससे पहले सपा समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो गया था, जिसके बाद सपा ने भाजपा और बसपा के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया था।


उत्तर प्रदेश में भाजपा नीत गठबंधन के पास लगभग 290 विधायक हैं, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन के पास लगभग 103 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 मतों की आवश्यकता होगी।


भाजपा सात सीटों पर आसानी से जीत सकती है, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन दो सीटें जीत सकता है। अंतिम सीट के लिए भाजपा के पास लगभग 31 प्राथमिक मत और सपा-कांग्रेस के पास लगभग 29 मत होने का अनुमान है।


उत्तराखंड में भाजपा के राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत है और इस सीट को बरकरार रखने की संभावना है।


चुनाव के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर होगी। यदि आवश्यक हुआ तो मतदान और मतगणना 16 अक्टूबर को होगी।