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उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच निवेश समझौतों की नई शुरुआत

सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सिंगापुर के उद्योगपतियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें नए निवेश समझौतों पर चर्चा की गई। इस बैठक में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। सीएम ने छह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी शामिल हैं। जानें इस साझेदारी के संभावित लाभ और योजनाओं के बारे में।
 

सीएम योगी की सिंगापुर के उद्योगपतियों के साथ बैठक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ में सिंगापुर के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और सतत अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्रों में नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक कंपनियों के साथ समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। सीएम ने UP-Singapore साझेदारी को सफल बनाने के लिए छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया।

सरकारी बयान के अनुसार, सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी, शहरी योजना और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की इच्छा जताई। सीएम योगी ने बताया कि फरवरी 2026 में सिंगापुर यात्रा के दौरान लगभग ₹60,000 करोड़ के निवेश समझौतों पर सहमति बनी थी। सिंगापुर रोडशो के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेशकों को सुरक्षा, स्थिरता और गति का भरोसा दिया था, और प्रदेश आज भी इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब हमारा लक्ष्य निवेश प्रस्तावों को वास्तविकता में बदलना और उत्पादन शुरू करना है।

MoU के तहत, प्रदेश सरकार निवेशकों के साथ Manufacturing और Groundbreaking से लेकर Production तक की प्रक्रिया में मजबूती से खड़ी रहेगी और हर स्तर पर आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। सिंगापुर के साथ साझेदारी को ठोस परिणामों तक पहुंचाने के लिए सीएम ने जेवर क्षेत्र, एक्सप्रेस-वे और फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के विकास, सेमीकंडक्टर फैब यूनिट और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, क्लाउड सर्विसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साथ ही सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, अपशिष्ट प्रबंधन और जल पुनर्चक्रण जैसी स्वच्छ तकनीकों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।