उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से सियासी समीकरणों में बदलाव की संभावना
राजनीतिक हलचल की शुरुआत
लखनऊ. पितृपक्ष के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियाँ फिर से तेज होने वाली हैं। अक्टूबर और नवंबर में राज्यसभा और विधान परिषद की कई सीटों के लिए चुनाव होंगे। राज्यसभा की 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी की 8, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की एक-एक सीट शामिल है। 25 नवंबर को खाली होने वाली 11 राज्यसभा सीटों में 10 उत्तर प्रदेश से और 1 उत्तराखंड से है। रिपोर्टों के अनुसार, इन चुनावों का कार्यक्रम अक्टूबर में घोषित होने की संभावना है.
राज्यसभा चुनाव का महत्व
देशभर में राजनीतिक माहौल गर्म रहने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा संख्या और राजनीतिक दलों के समर्थन के आधार पर राज्यसभा चुनाव का गणित महत्वपूर्ण होगा। प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से कुछ खाली हैं, जिससे प्रभावी सदस्यों की संख्या कम हो गई है। राज्यसभा चुनाव में एक सीट के लिए आवश्यक वोटों की संख्या उन विधायकों की संख्या और खाली सीटों के आधार पर तय होती है। इसीलिए, भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों के बीच वोटों का गणित चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
विधान परिषद की सीटों पर चुनाव
राज्यसभा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए भी चुनाव महत्वपूर्ण होंगे। इनमें 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं, जिनका कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, इलाहाबाद-झांसी, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शामिल हैं.
इन सीटों पर चुनाव राज्यसभा से अलग प्रक्रिया के तहत होंगे। यहां मतदाता आम विधायक नहीं, बल्कि संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के रजिस्टर मतदाता होते हैं। राजनीतिक दलों के साथ-साथ शिक्षक संगठन भी अपने उम्मीदवारों की तैयारी कर रहे हैं। जुलाई 2026 में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारने की घोषणा की थी.