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उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का विधायक संकट: एक नई चुनौती

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का कोई विधायक नहीं रह गया है, जो पिछले तीन दशकों में पहली बार है। 2022 के विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट जीतने के बाद, पार्टी अब बिना विधायक के है। हाल ही में उमाशंकर सिंह के निधन ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। बसपा की स्थिति केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी पार्टी का कोई विधायक नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा की संभावनाएं क्या होंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
 

बसपा का विधायक संकट


मार्च 2012 तक, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार का नेतृत्व कर रही थी। लेकिन अब, उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में बसपा का कोई भी सदस्य नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल एक सीट मिली थी, जो बलिया की रसरा सीट से उमाशंकर सिंह की व्यक्तिगत जीत थी। हाल ही में, उनका निधन कैंसर के कारण हो गया, जिससे बसपा अब बिना विधायक के रह गई है।


यह पहली बार है जब पिछले तीन दशकों में बसपा का उत्तर प्रदेश में कोई विधायक नहीं है। इसके अलावा, लोकसभा में भी पार्टी का कोई सांसद नहीं है और रामजी गौतम के रिटायर होने के बाद राज्यसभा में भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। बसपा की स्थिति केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है; देश के कई अन्य राज्यों में भी पार्टी के विधायक नहीं हैं। एक समय था जब बसपा के विधायक आधा दर्जन राज्यों में थे, लेकिन अब राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी पार्टी का कोई विधायक नहीं है। हालांकि, बिहार में एक विधायक अभी भी पार्टी के साथ है, लेकिन उनकी स्थिरता पर सवाल उठता है।


आगामी विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने वाले हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बसपा अपना खाता खोलने में सफल होती है।