उत्तर प्रदेश में राजनीतिक पोस्टर युद्ध: अखिलेश यादव पर माफिया के आरोप
राजनीतिक पोस्टरों का प्रभाव
राजनीतिक पोस्टर: इन पोस्टरों में माफियाओं की छवियों के साथ अखिलेश यादव पर सीधा हमला किया गया है। पोस्टरों पर लिखा गया है ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’। रिपोर्टों के अनुसार, ये पोस्टर लखनऊ, उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर जैसे विभिन्न स्थानों पर लगाए गए हैं। खास बात यह है कि इन पोस्टरों में यूपी के विभिन्न क्षेत्रों - अवध, रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के अनुसार अलग-अलग नाम और तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं।
इन पोस्टरों के माध्यम से सपा सरकार के कार्यकाल और उस समय चर्चा में रहे कथित आपराधिक चेहरों पर सवाल उठाए गए हैं। एक पोस्टर में आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ लिखा गया है- ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार।’ इसके अलावा, पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, आजम खान, याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना, संजीव जीवा, मुकीम काला, उमाकांत यादव और रमाकांत यादव जैसे कई नामों का उल्लेख किया गया है।
#WATCH | Uttar Pradesh: A poster with pictures of Atiq Ahmed, Azam Khan and Mukhtar Ansari with words “Azam, Atiq aur Mukhtar, yahi chalate thhey sarkar. Akhilesh ke mafia, mafia ke Akhilesh’ seen in Lucknow. https://t.co/vY9IDC4bN6
— News Media (@ANI) September 21, 2026
यह ध्यान देने योग्य है कि इन पोस्टरों में केवल माफिया के नाम नहीं हैं, बल्कि विभिन्न नेताओं और आपराधिक मामलों से जुड़े आरोपों और घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। आजम खान पर भैंस चोरी का आरोप, नवाब सिंह पर दुष्कर्म का आरोप, इरफान सोलंकी पर आगजनी का मामला और दीप नारायण सिंह यादव से जुड़े कथित मामले का जिक्र किया गया है।
पश्चिमी यूपी के पोस्टरों में कैराना पलायन के संदर्भ में मुकीम काला का नाम और संजीव जीवा के संदर्भ में पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या का उल्लेख किया गया है। पूर्वांचल में जहरीली शराब कांड के संदर्भ में रमाकांत यादव का नाम भी शामिल किया गया है। इस प्रकार, इन पोस्टरों के जरिए सपा के पुराने शासनकाल, उससे जुड़े नेताओं और अपराध के मुद्दों को एक साथ जोड़कर चुनावी नैरेटिव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अब यह देखना है कि 2027 के चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में पोस्टर युद्ध कितना आगे बढ़ेगा। क्या यह पोस्टर युद्ध केवल कानून-व्यवस्था और अपराध के मुद्दों तक सीमित रहेगा, या समाजवादी पार्टी भी इसका जवाब उसी अंदाज में देगी? चुनाव भले ही दूर हों, लेकिन यूपी में राजनीतिक पोस्टर पहले से ही दीवारों पर अपनी जगह बना चुके हैं।