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उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में दवा माफिया का बड़ा खेल: सीएमओ की मिलीभगत का खुलासा

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में दवा माफिया और सीएमओ की मिलीभगत का एक नया मामला सामने आया है। हाल ही में जारी टेंडरों में लाखों रुपये की सामग्री खरीदने के लिए दवा माफिया ने खुद ही टेंडर तैयार किए हैं। इस मामले में अम्बेडकर नगर के टेंडरों में 'मेरठ' का उल्लेख भी किया गया है, जो सवाल उठाता है कि यह कैसे संभव है। जानें इस भ्रष्टाचार के पीछे की सच्चाई और कैसे यह खेल चल रहा है।
 

स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का नया मामला


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। दवा माफिया अब बेखौफ होकर विभाग के अंदर अपने काम कर रहे हैं, जिसमें अधिकारियों से लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) तक शामिल हैं। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें लाखों रुपये के टेंडर दवा माफिया द्वारा खुद तैयार किए जा रहे हैं, और सीएमओ भी इसमें सहयोग कर रहे हैं। पहले भी बताया गया था कि दवा माफिया मुकेश श्रीवास्तव अपने करीबी सीएमओ के जेम पोर्टल की आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके करोड़ों की खरीद-फरोख्त कर रहा है।


अब अम्बेडकर नगर के दो टेंडर सामने आए हैं, जो 23 मार्च को जारी किए गए थे। इन टेंडरों में डायग्नोस्टिक सेवाओं के लिए 14,13,760.00 और 16,81,360.00 रुपये की सामग्री खरीदने का प्रावधान था। हालांकि, जब इस टेंडर की जांच की गई, तो दवा माफियाओं और सीएमओ के बीच की मिलीभगत स्पष्ट हो गई।


इन टेंडरों में उल्लेख किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत डायग्नोस्टिक सेवाओं के संचालन के लिए दिशा निर्देश प्राप्त हुए हैं। लेकिन अम्बेडकर नगर में सेवाओं के संचालन के लिए टेंडर में 'मेरठ' का उल्लेख कैसे आया, यह सवाल उठता है।



सूत्रों के अनुसार, अम्बेडकर नगर सहित प्रदेश के कई जिलों में दवा माफिया मुकेश श्रीवास्तव के करीबी सीएमओ तैनात हैं। ये सीएमओ अपने जेम पोर्टल की आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके एक समान टेंडर जारी करते हैं, जैसा कि अम्बेडकर नगर के टेंडरों में देखा गया है।



पहले भी बताया गया था कि मुकेश श्रीवास्तव अपने सीएमओ की तैनाती के बाद उनके जेम पोर्टल की आईडी और पासवर्ड हासिल कर लेते हैं, जिससे वे करोड़ों की खरीद-फरोख्त का खेल शुरू करते हैं। पहले ये काम लखनऊ के इंदिरानगर स्थित लेखराज मार्केट से किया जाता था, लेकिन हालिया रिपोर्ट के बाद उन्होंने अपना कार्यालय स्थानांतरित कर लिया है। फिर भी, दवा माफिया और सीएमओ की मिलीभगत एक बार फिर उजागर हो गई है।