उत्तराखंड में 12 प्रमुख विकास परियोजनाओं की समीक्षा, सीएम ने दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री की बैठक में विकास परियोजनाओं की समीक्षा
उत्तराखंड: देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के तहत उत्तराखंड भी सक्रिय है। इस संदर्भ में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें प्रगति पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वपूर्ण अवसंरचना और विकास परियोजनाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक में परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन और अन्य विभागों की 6,940 करोड़ रुपये की 12 प्रमुख परियोजनाओं की जानकारी ली गई।
सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं की प्रगति को तेज करने के लिए हर महीने सीएम स्तर पर और 10 दिनों में मुख्य सचिव स्तर पर समीक्षा की जाए। यदि परियोजनाओं में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रगति पोर्टल के माध्यम से राज्य की विभिन्न महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन तथा अन्य विभागों की… pic.twitter.com/WdpDzj43dY
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) June 8, 2026
सीएम धामी ने यह भी कहा कि जिन परियोजनाओं में भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, क्षतिपूर्ति भुगतान या अन्य प्रशासनिक कारणों से देरी हो रही है, उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने प्रगति पोर्टल को एक प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में उपयोग करने का निर्देश दिया, ताकि हर परियोजना की नियमित समीक्षा की जा सके।
बैठक में रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला, बनबसा एवं रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र परियोजनाओं, चारधाम सड़क परियोजनाओं, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क परियोजना, हरिद्वार एवं काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
सीएम ने वन भूमि हस्तांतरण, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों, भूमि अधिग्रहण तथा क्षतिपूर्ति वितरण से संबंधित लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट समय सीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिया गया कि वे जिला स्तर पर लंबित मामलों की व्यक्तिगत निगरानी करें और उनका त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि हर परियोजना के लिए जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए नियमित मॉनिटरिंग की जाए। जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित स्तर से कम है, उनके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।