उत्तराखंड में उच्च शिक्षा पर मुख्यमंत्री धामी का महत्वपूर्ण बयान
मुख्यमंत्री का शिक्षा पर जोर
उत्तराखंड: शनिवार को देहरादून के शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में शिक्षा के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वैश्विक परिवर्तनों के मद्देनजर उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी भूमिका में बदलाव लाना होगा। उन्हें पारंपरिक शिक्षण केंद्रों से आगे बढ़कर ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में स्थापित होना चाहिए। सीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के माध्यम से एक वैश्विक स्टार्टअप हब में बदल चुका है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सराहना
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों के समग्र विकास के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है। धामी ने उत्तराखंड की समृद्ध ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को भारतीय मूल्यों से जोड़ने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक से भी सुसज्जित कर रही है। इसके तहत स्कूलों और कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
रोजगार के अवसरों पर ध्यान
रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि युवाओं को केवल नौकरी खोजने की मानसिकता से बाहर लाना आवश्यक है। सरकार का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व और उद्यमिता की भावना विकसित करना है ताकि वे स्वयं रोजगार सृजन कर सकें। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। कॉलेजों में उद्योग से जुड़े पाठ्यक्रम, अनिवार्य इंटर्नशिप और स्टार्टअप के लिए इन्क्यूबेशन सेंटरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बौद्धिक विमर्श में प्रमुख हस्तियां
इस विचार गोष्ठी में राजनीति और शिक्षा के क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं। समारोह में भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन नबीन, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने विचार साझा किए। शिवालिक कॉलेज के अध्यक्ष सुनील कुमार और उपाध्यक्ष अजय कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। इस गोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया और 2047 तक भारत को विकसित देशों की श्रेणी में लाने के लिए शिक्षा के रोडमैप पर सहमति व्यक्त की।