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उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की मांग की

तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को समाप्त करने की मांग की है, यह कहते हुए कि यह समाज में विभाजन पैदा करता है। इस दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी उपस्थित थे, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उदयनिधि ने राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' को नजरअंदाज करने की कोशिशों का विरोध किया और सरकार को चेतावनी दी कि इस मामले में समझौता नहीं होना चाहिए। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया।
 

तमिलनाडु विधानसभा में विवादित बयान


तमिलनाडु: तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म को समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह धर्म समाज में विभाजन पैदा करता है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए। इस दौरान राज्य के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी वहां उपस्थित थे, लेकिन उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।


मद्रास हाई कोर्ट ने पहले भी DMK नेता की इसी तरह की टिप्पणियों को नफरत फैलाने वाला भाषण करार दिया था। विधानसभा में अपने पहले भाषण में उदयनिधि ने कहा, 'सनातन धर्म लोगों को बांटता है और इसे निश्चित रूप से खत्म किया जाना चाहिए।'


उदयनिधि का आगे का बयान

उन्होंने आगे क्या कहा?


उदयनिधि ने कहा कि विपक्ष, तमिल आह्वान गीत 'तमिल थाई वाजथु' को नजरअंदाज करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देगा। उन्होंने सितंबर 2023 में भी इसी तरह के बयान दिए थे।


राज्य गीत पर शिकायत

क्या की थी शिकायत?


उदयनिधि ने शिकायत की थी कि राज्य गीत को कार्यवाही में तीसरे स्थान पर रखा गया था, जबकि इसे उसका पारंपरिक महत्व दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, 'आपकी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ऐसी घटना होना एक गलती थी और इसे दोबारा नहीं होने देना चाहिए।'


उन्होंने जोर देकर कहा कि 'तमिल थाई वाज़थु' को हमेशा पहले स्थान पर रखा जाना चाहिए, न केवल विधानसभा में बल्कि तमिलनाडु में किसी भी सरकारी कार्यक्रम में भी।


मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

कैसी थी CM की प्रतिक्रिया?


जब उदयनिधि ने सनातन धर्म पर टिप्पणी की, तब मुख्यमंत्री विजय विधानसभा में मौजूद थे। DMK नेता के भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री को विपक्ष के नेता का भाषण ध्यान से सुनते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने कोई मौखिक प्रतिक्रिया नहीं दी और अंत में हाथ जोड़कर अपनी सहमति जताई।


सरकार को चेतावनी

सरकार को क्या दी चेतावनी?


उदयनिधि ने सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले में कभी समझौता न करे। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों और परंपराओं की रक्षा के लिए हमें सतर्क रहना होगा। उन्होंने सदन को 2023 की एक घटना की याद दिलाई, जब तत्कालीन DMK सरकार ने राज्यपाल द्वारा स्थापित प्रोटोकॉल में बदलाव का विरोध किया था।