उपेंद्र कुशवाहा की भूमिका और भाजपा की रणनीति पर नजर
बिहार में भाजपा की नई राजनीतिक चाल
बिहार में भारतीय जनता पार्टी ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री के रूप में चुना है, जो कुशवाहा समुदाय से संबंधित हैं। यह कदम नीतीश कुमार द्वारा स्थापित लव कुश समीकरण का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि, भाजपा ने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है, और उनके बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए रखा है। सुप्रीम कोर्ट की कई बार की फटकार के बावजूद भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा को सरकार से हटाने का कदम नहीं उठाया। जब अदालत की नाराजगी बढ़ी, तो भाजपा ने एक सवर्ण एमएलसी का इस्तीफा लेकर दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाया ताकि वे मंत्री बने रह सकें। अब सवाल यह है कि भाजपा को उपेंद्र कुशवाहा की इतनी आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है, जबकि मुख्यमंत्री उसी समुदाय से हैं।
भाजपा की योजना है कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय कर लें। पहले भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा ने विचार करने का आश्वासन दिया था। हाल ही में, पटना के एक होटल में इस विषय पर लंबी बातचीत हुई थी, जिसके बाद अमित शाह ने उनके बेटे के दूसरी बार शपथ लेने की अनुमति दी। अब फिर से विलय का मुद्दा उठ रहा है। दीपक प्रकाश को जो एमएलसी की सीट मिली है, उसका कार्यकाल केवल आठ महीने का है, जो अगले साल मार्च में समाप्त होगा। क्या उन्हें फिर से छह साल के लिए एमएलसी बनाया जाएगा? भाजपा के जानकार नेताओं का मानना है कि यदि उपेंद्र कुशवाहा विलय के लिए सहमत नहीं होते हैं, तो भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भाजपा का उद्देश्य यह है कि कुशवाहा समुदाय, जो राजनीतिक रूप से जागरूक है और जाति के आधार पर वोट करता है, पूरी तरह से भाजपा के साथ बना रहे।