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उमर अब्दुल्ला का स्वतंत्रता दिवस पर केंद्र सरकार पर हमला: क्या जम्मू-कश्मीर का दर्जा लौटेगा?

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया, धारा 370 के निरस्त्रीकरण और राज्य का दर्जा खत्म करने को लेकर। उन्होंने कहा कि यदि विशेष दर्जा न छीना गया होता, तो PoK के लोग भी जम्मू-कश्मीर में विलय की मांग कर रहे होते। भाजपा ने उनकी टिप्पणी को राष्ट्रीय पर्व पर गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। अब्दुल्ला ने अपने संघर्ष को जारी रखने का आश्वासन दिया, जबकि भाजपा ने उन्हें राजनीतिक बयानबाजी करने के लिए आलोचना की।
 

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान


नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर श्रीनगर में तिरंगा फहराने के बाद केंद्र सरकार पर धारा 370 के निरस्त्रीकरण और राज्य का विशेष दर्जा समाप्त करने को लेकर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र ने 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा नहीं छीना होता, तो आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोग भी जम्मू-कश्मीर में विलय की मांग कर रहे होते। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी, इसे राष्ट्रीय पर्व पर गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।


उमर अब्दुल्ला का बड़ा दावा

उमर अब्दुल्ला ने PoK में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और वहां के नागरिकों के साथ हो रहे व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने 1947 के इतिहास को याद करते हुए अपने दादा शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की सराहना की, जिन्होंने भारतीय सेना के आगमन से पहले कबाइलियों के खिलाफ कश्मीरियों को एकजुट किया था। उन्होंने कहा कि 1947 में हमारे पूर्वजों द्वारा दिया गया 'हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार' का नारा आज भी प्रासंगिक है।


राज्य का दर्जा

उमर अब्दुल्ला ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने और अगस्त 2019 में छीने गए संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि जब तक अंतिम आतंकवादी का खात्मा नहीं होता और हमारे अधिकार वापस नहीं मिलते, तब तक यह लड़ाई खत्म नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि विधानसभा में आज भी PoK के लिए सीटें खाली रखी गई हैं, इस उम्मीद में कि किसी दिन वहां के प्रतिनिधि भारत का हिस्सा बनकर इन्हें भरेंगे।


भाजपा का पलटवार

उमर अब्दुल्ला के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुनील शर्मा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर जहां सभी को एकजुट होकर राष्ट्रीय ध्वज का जश्न मनाना चाहिए था, वहां मुख्यमंत्री ने राजनीतिक बयानबाजी की। सुनील शर्मा ने कहा कि उमर अब्दुल्ला को इस मंच का उपयोग अपनी सरकार के प्रदर्शन और केंद्र शासित प्रदेश के विकास के रोडमैप को साझा करने के लिए करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इसका इस्तेमाल केवल केंद्र पर निशाना साधने के लिए किया।