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उमर अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 को लेकर जताई प्रतिबद्धता

उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अधिकारों की बहाली के लिए संघर्षरत है। वहीं, सज्जाद लोन ने इसे एक क्रूर तख्तापलट करार दिया है। जानिए इस मुद्दे पर दोनों नेताओं की क्या राय है और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इसका क्या असर हो सकता है।
 

उमर अब्दुल्ला का बयान


जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर में हुए परिवर्तनों को पलटने के अपने संकल्प पर अडिग है। उन्होंने कहा कि सात साल बीत जाने के बावजूद उनकी पार्टी ने न तो इन घटनाओं को भुलाया है और न ही अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद उत्पन्न परिस्थितियों को स्वीकार किया है।


उमर ने केंद्र सरकार के पांच अगस्त के निर्णयों की सातवीं वर्षगांठ पर कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर से छीने गए अधिकारों को पुनर्स्थापित करने और राज्य की पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सात साल हो गए, हम न तो भूले हैं और न ही मौजूदा हालात से समझौता किया है। मेरी पार्टी और मैं उन सभी निर्णयों को पलटने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो जम्मू-कश्मीर के खिलाफ लिए गए हैं।"


उन्होंने रॉबर्ट फ्रॉस्ट की प्रसिद्ध कविता 'स्टॉपिंग बाय वुड्स ऑन ए स्नोई इवनिंग' का उल्लेख करते हुए कहा, "जंगल प्यारे, घने और गहरे हैं लेकिन मुझे अपने वादे पूरे करने हैं। सोने से पहले मीलों का सफर तय करना है।"


सज्जाद लोन का बयान

पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और विधायक सज्जाद लोन ने पांच अगस्त 2019 की घटना को जम्मू-कश्मीर के लोगों के खिलाफ एक 'क्रूर कार्रवाई' बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "पांच अगस्त, 2019 जम्मू-कश्मीर के लोगों के खिलाफ एक बेरहम तख्तापलट था।


उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग इसे नफरत और तिरस्कार की दृष्टि से देखेंगे। यह दिन जम्मू-कश्मीर के लोगों की ताकत छीनने का था। जब अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35ए को समाप्त किया गया और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया।


लोन ने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अधिकार के रूप में फिर से सशक्त बनाया जाएगा, न कि खैरात के रूप में। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा समाप्त कर दिया था।