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एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला: POCSO अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और साइबर अपराध पर जागरूकता

नारनौल में आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में POCSO अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और साइबर अपराधों पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि डॉ. मंगल सेन ने बच्चों की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया और साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए। कार्यशाला का उद्देश्य आम जनता में जागरूकता बढ़ाना था। जानें इस कार्यक्रम में क्या-क्या हुआ और बच्चों के खिलाफ अपराधों के दंड के बारे में।
 

कार्यशाला का आयोजन


  • बच्चे समाज के सबसे कोमल और संवेदनशील सदस्य: डॉ. मंगल सेन


नारनौल में POCSO अधिनियम पर कार्यशाला का आयोजन:
जिला बाल संरक्षण इकाई ने पंचायत भवन में पोक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम और साइबर अपराध पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नगराधीश डॉ. मंगल सेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और चाइल्ड हेल्पलाइन से संबंधित पोस्टर जारी किए।


बच्चों की सुरक्षा का महत्व

डॉ. मंगल सेन ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे समाज के सबसे नाजुक और संवेदनशील सदस्य होते हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह बच्चों के सुधार और पुनर्वास को सुनिश्चित करता है। उन्होंने यह भी बताया कि 18 वर्ष से कम आयु का हर व्यक्ति बच्चा माना जाता है और बच्चों से संबंधित किसी भी घटना की सूचना टोल फ्री नंबर 1098 या 112 पर दी जा सकती है।


साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। सहायक जिला न्यायवादी नवीन श्योराण ने पोक्सो अधिनियम की जानकारी दी, जबकि साइबर क्राइम थाना के एसआई इंद्रजीत ने साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए।


बच्चों के खिलाफ अपराध और दंड

जिला बाल संरक्षण अधिकारी संदीप ने बताया कि किसी भी पीड़ित बच्चे की पहचान, नाम, पता या फोटो को सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए छह महीने की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।


बच्चों के साथ क्रूरता या दुर्व्यवहार करने पर तीन वर्ष की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। यदि यह अपराध किसी संस्था के कर्मचारी द्वारा किया जाता है, तो सजा पांच वर्ष और जुर्माना पांच लाख रुपये तक हो सकता है।


बच्चों के कल्याण के लिए स्पॉन्सरशिप योजना

स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता महिलाओं के बच्चों, अनाथ बच्चों और गंभीर बीमारी से पीड़ित अभिभावकों के स्कूल जाने वाले बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।


लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम-2012

पॉक्सो अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को लैंगिक हमलों, उत्पीड़न और अश्लील साहित्य से संबंधित अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना है। इसके तहत विशेष न्यायालयों की स्थापना भी की गई है ताकि ऐसे मामलों का त्वरित निपटान किया जा सके।