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एच-1बी वीजा आवेदनों की जांच पर एफआईआईडीएस की प्रतिक्रिया

फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) ने एच-1बी वीजा आवेदनों की सख्त जांच का स्वागत किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि यह अमेरिकी नवोन्मेष की कीमत पर नहीं होना चाहिए। संगठन ने कहा कि कुछ नौकरियों के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल की आवश्यकता होती है, और घरेलू श्रम बाजार में हमेशा योग्य कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते। ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम की निगरानी कड़ी करने का निर्णय लिया है, जिससे भारतीयों का सबसे बड़ा समूह प्रभावित हो रहा है।
 

एफआईआईडीएस का बयान

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 19 सितंबर - 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (एफआईआईडीएस) ने एच-1बी वीजा आवेदनों की सख्त जांच का स्वागत किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि यह अमेरिकी नवोन्मेष की कीमत पर नहीं होना चाहिए। संगठन ने कहा कि कुछ नौकरियों के लिए अत्यधिक विशिष्ट कौशल की आवश्यकता होती है, और घरेलू श्रम बाजार में हमेशा योग्य कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा कार्यक्रम की निगरानी कड़ी किए जाने के कुछ घंटे बाद आया। ट्रंप ने कहा कि कुछ नियोक्ताओं, विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आउटसोर्सिंग कंपनियों ने इस कार्यक्रम का दुरुपयोग किया है।


कौशल की कमी और समाधान

एफआईआईडीएस में नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कांड ने एक बयान में कहा, 'एफआईआईडीएस अमेरिका के राष्ट्रीय एवं आर्थिक हितों की रक्षा करने के प्रशासन के प्रयासों की सराहना करता है। ये उचित उद्देश्य हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की नवोन्मेष में अग्रणी स्थिति असाधारण प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता पर निर्भर करती है। कांड ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, उन्नत सेमीकंडक्टर, और डेटा इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में नियोक्ताओं को वास्तविक कौशल की कमी का सामना करना पड़ सकता है।


कर्मचारियों की सुरक्षा

कांड ने कहा, 'अमेरिका तभी मजबूत होगा जब वह कर्मचारियों को शोषण और भेदभाव से बचाएगा और कानून का पालन करने वाले नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करेगा।' उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एक पारदर्शी और योग्यता आधारित व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और नियम तोड़ने वालों के लिए ठोस दंड शामिल हों।


ट्रंप का शुल्क बढ़ाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों को लाने वाले नियोक्ताओं पर एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क एक साल के लिए बढ़ा दिया है। व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि की है। ट्रंप ने बताया कि 2025 में इस शुल्क के लागू होने के बाद बड़ी आईटी कंपनियों द्वारा एच-1बी वीजा के लिए पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई है। भारतीय एच-1बी वीजा कार्यक्रम के लाभार्थियों में सबसे बड़ा समूह हैं।