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एयर इंडिया के दो पायलट ड्रग टेस्ट में असफल, जांच जारी

एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में पायलट के ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद, एयरलाइन ने जांच शुरू की है। इस प्रक्रिया में दो अन्य पायलट भी प्रारंभिक टेस्ट में असफल रहे हैं। सभी पायलटों का ड्रग टेस्ट अनिवार्य किया गया है। यह मामला तब सामने आया जब केबिन क्रू के एक सदस्य ने पायलट पर गांजे के सेवन का आरोप लगाया। जानें इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और नियम क्या हैं।
 

नई दिल्ली में ड्रग टेस्ट की जांच

नई दिल्ली: एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान में पायलट के ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद, एयरलाइन ने जांच शुरू की है। इस जांच में दो अन्य पायलट भी प्रारंभिक ड्रग टेस्ट में असफल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इन दोनों पायलटों को फिलहाल ड्यूटी से हटा दिया गया है और उनके अंतिम टेस्ट के परिणामों का इंतजार किया जा रहा है।


सभी पायलटों का ड्रग टेस्ट अनिवार्य

एयर इंडिया ने इस घटना के बाद अपने सभी पायलटों के ड्रग टेस्ट कराने का निर्णय लिया है। यह जांच एयरलाइन की नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत की जा रही है। अब तक 300 से अधिक पायलटों का परीक्षण किया जा चुका है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने में आमतौर पर 24 से 48 घंटे का समय लगता है।


केबिन क्रू की शिकायत से शुरू हुई जांच

सूत्रों के अनुसार, फुकेत-दिल्ली उड़ान में मौजूद केबिन क्रू के एक सदस्य ने शिकायत की थी कि उड़ान से पहले पायलट ने कथित तौर पर गांजे का सेवन किया था। इस शिकायत के बाद पायलट का ड्रग टेस्ट किया गया, जिसमें प्रारंभिक रिपोर्ट पॉजिटिव आई।


हालांकि, किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई फाइनल टेस्ट रिपोर्ट और संबंधित जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जाएगी।


टर्बुलेंस के दौरान विमान की स्थिति

यह मामला 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान AI2379 में हुई टर्बुलेंस की घटना के बाद सामने आया। एयरबस A320 विमान में 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य समेत कुल 145 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया, जिससे लगभग 24 लोग घायल हो गए थे।


घटना के बाद पायलट का ड्रग टेस्ट कराया गया था, जिसमें पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद एयरलाइन ने सभी पायलटों की जांच कराने का निर्णय लिया।


पॉजिटिव आने पर नियम क्या हैं?

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियमों के अनुसार, यदि कोई पायलट या विमानन कर्मचारी मादक पदार्थों के सेवन की जांच में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे नशामुक्ति कार्यक्रम में भेजा जा सकता है। दोबारा पॉजिटिव पाए जाने पर संबंधित पायलट का लाइसेंस तीन वर्ष के लिए निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार नियमों का उल्लंघन होने पर लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान है।


फिलहाल एयर इंडिया के दोनों पायलटों के मामले में अंतिम टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद ही उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई तय होगी।