कर्नाटक की राजनीति में राहुल गांधी की अहम मुलाकात: क्या बनेगा सत्ता साझेदारी का हल?
कर्नाटक में सत्ता साझेदारी का विवाद
कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति में सत्ता साझेदारी के ढाई-ढाई साल के समझौते को लेकर लंबे समय से असमंजस बना हुआ है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इस मुद्दे पर खुलकर बात करने से बचते रहे हैं, लेकिन उनके समर्थक और पार्टी के अन्य नेता इस विषय को लेकर बेंगलुरु से दिल्ली तक चर्चा कर रहे हैं।
राहुल गांधी की मुलाकात का महत्व
पिछले साल नवंबर और दिसंबर में इस मुद्दे पर काफी चर्चा हुई थी, और अब यह फिर से सुर्खियों में है। मंगलवार को, जब राहुल गांधी तमिलनाडु के लिए रवाना हो रहे थे, तब उन्होंने मैसूर एयरपोर्ट पर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से मुलाकात की। औपचारिक स्वागत के बाद, राहुल ने दोनों नेताओं के साथ कुछ समय बिताया, जिसकी बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस मुलाकात को सत्ता साझेदारी के विवाद से जोड़ा जा रहा है।
डीके शिवकुमार की महत्वाकांक्षा
सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में डीके शिवकुमार ने राहुल गांधी से दिल्ली में मिलने का समय मांगा। राहुल ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बात करेंगे। यह भी बताया गया है कि शिवकुमार लंबे समय से राहुल से मिलने की कोशिश कर रहे हैं और मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी महत्वाकांक्षा किसी से छिपी नहीं है।
विशेष विधानसभा सत्र की जानकारी
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राहुल को कर्नाटक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की जानकारी दी, जो मनरेगा के स्थान पर लाए गए वीबी जीरामजी कानून के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। सिद्धारमैया ने इससे पहले नवंबर में भी राहुल से मुलाकात की थी।
कांग्रेस की आगामी बैठक
कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, जनवरी के अंतिम सप्ताह में कर्नाटक के मुद्दे पर दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। कांग्रेस नेतृत्व विभिन्न राज्यों की समीक्षा बैठकें कर रहा है, और कर्नाटक की बैठक 22 जनवरी के आसपास होने की संभावना है।
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच संतुलन
कांग्रेस आलाकमान सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव चाहते हैं, जबकि उप मुख्यमंत्री शीर्ष पद की दावेदारी बनाए हुए हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी भी बड़े निर्णय से पहले सोच-समझकर कदम उठाना चाहता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनवरी में होने वाली बैठक से कोई ठोस समाधान निकलता है या नहीं।