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कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे का आरएसएस पर तीखा हमला

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने आरएसएस और भाजपा के बीच चल रहे विवाद को और बढ़ा दिया है। उन्होंने भाजपा को आरएसएस का कठपुतली करार दिया और संघ के इतिहास पर गंभीर सवाल उठाए। खरगे ने यह भी पूछा कि आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान दिया है और नागपुर में तिरंगा फहराने में इतना समय क्यों लगा। इस विवाद में आरएसएस और भाजपा ने खरगे के आरोपों को खारिज किया है। जानें इस राजनीतिक टकराव की पूरी कहानी।
 

आरएसएस और भाजपा के बीच बढ़ता विवाद


नई दिल्ली। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच का विवाद अब और भी गंभीर हो गया है। खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा और आरएसएस को निशाने पर लिया, उन्हें आरएसएस का कठपुतली करार दिया।


भाजपा की प्रतिक्रिया पर सवाल

प्रियांक खरगे ने कहा कि जब भी आरएसएस से कोई सवाल उठाया जाता है, भाजपा तुरंत प्रतिक्रिया देती है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा हमेशा आरएसएस की एक साधारण सहयोगी नहीं रही, बल्कि एक उपकरण के रूप में कार्य करती है। खरगे के अनुसार, भाजपा का हर पलटवार इस बात का प्रमाण है कि असली नियंत्रण किसके हाथ में है।


Rattle the RSS & BJP hisses.

Everytime anyone questions the RSS, BJP loses its composure.

Ask why an organisation that contributed nothing to the freedom struggle now lectures the nation on patriotism and the BJP hisses back.

Ask why it took 52 years for the Tricolour to be… pic.twitter.com/oTgmeY5s7L

— Priyank Kharge / ಪ್ರಿಯಾಂಕ್ ಖರ್ಗೆ (@PriyankKharge) June 25, 2026



आरएसएस के इतिहास पर उठाए सवाल

खरगे ने आरएसएस के इतिहास पर भी सवाल उठाए, यह पूछते हुए कि जिस संगठन ने स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं दिया, वह आज देश को देशभक्ति पर क्यों लेक्चर दे रहा है? उन्होंने यह भी पूछा कि नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा फहराने में 52 साल क्यों लगे। इसके अलावा, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या संघ वास्तव में डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान को मानता है या अपने खुद के संविधान को।


आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर सवाल

यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रियांक खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखा। संघ अपने 100 साल पूरे करने जा रहा है, इस अवसर पर खरगे ने संगठन की कानूनी स्थिति और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी गतिविधियों के लिए पारदर्शिता और टैक्स नियमों का पालन होना चाहिए।


आरएसएस और भाजपा की प्रतिक्रिया

आरएसएस और भाजपा ने खरगे के आरोपों को खारिज कर दिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसे 'राजनीतिक स्टंट' करार दिया और कहा कि उन्हें इस पत्र का जवाब देने की आवश्यकता नहीं है। भाजपा के सांसद रमेश जिगाजिनागी ने चेतावनी दी कि जो भी आरएसएस को छूने की कोशिश करेगा, वह बच नहीं पाएगा। इस पर खरगे ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या आरएसएस एक आतंकवादी संगठन है जो सवाल उठाने वालों को खत्म कर देता है। उन्होंने कहा कि वे बाबासाहेब की विचारधारा के अनुयायी हैं और ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।