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कर्नाटक में भाजपा विधायक की विवादास्पद टिप्पणी पर एफआईआर दर्ज

कर्नाटक में भाजपा विधायक यशपाल सुवर्णा की राहुल गांधी के परिवार पर की गई विवादास्पद टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। इस बयान के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कांग्रेस ने भाजपा पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। विधायक के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठ रही है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और कांग्रेस ने क्या प्रतिक्रिया दी है।
 

राजनीतिक विवाद का जन्म

बेंगलुरु: कर्नाटक में भाजपा के विधायक यशपाल सुवर्णा की एक विवादास्पद टिप्पणी ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के परिवार के बारे में दिए गए बयान के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है।


उडुपी टाउन पुलिस स्टेशन में यह मामला उडुपी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार कोडावूर की शिकायत पर दर्ज किया गया। पुलिस ने विधायक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 57, 192, 196(2), 352, 353(2) और 351(2) के तहत कार्रवाई की है।


जानकारी के अनुसार, उडुपी में भाजपा द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यशपाल सुवर्णा ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, “यदि आप लोग ऐसे ही नाटक करते रहे, तो जैसे 1992 में हमारे कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया था, उसी तरह राहुल गांधी का परिवार भी समाप्त कर दिया जाएगा।”


इस बयान के बाद कर्नाटक की राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस ने भाजपा पर नफरत फैलाने और धमकी देने का आरोप लगाया है। विधायक का भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिसके बाद उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठने लगी है।


कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के कार्यकारी अध्यक्ष और एमएलसी मंजूनाथ भंडारी ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यशपाल सुवर्णा की टिप्पणी को ‘घृणित, अपमानजनक और भड़काऊ’ बताया और कहा कि संविधान की शपथ लेने वाले किसी जनप्रतिनिधि के लिए ऐसी भाषा उचित नहीं है।


भंडारी ने आरोप लगाया कि भाजपा नीट पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमले कर रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद कभी भी मानहानि, नफरत फैलाने वाले भाषण या धमकी का आधार नहीं बन सकते। इस तरह की टिप्पणियों से तटीय कर्नाटक में सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इस मामले को राज्य के गृह मंत्री के सामने उठाने और जांच में तेजी लाने की मांग की।