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कर्नाटक में मतदाता सूची का पुनरीक्षण: 1.08 करोड़ नाम ड्राफ्ट से बाहर रहने की संभावना

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रहने की संभावना है। 5.54 करोड़ फॉर्म वितरित किए गए हैं, जिनमें से कई का सत्यापन नहीं हो पाया है। पहली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 24 अगस्त को जारी की जाएगी, जिसके बाद मतदाता अपनी जानकारी में सुधार कर सकेंगे। दिल्ली में भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है, जहां 66.84 फीसदी फॉर्म ही डिजिटाइज हो पाए हैं। जानें और भी महत्वपूर्ण जानकारी इस लेख में।
 

मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया


नई दिल्ली: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य चल रहा है। घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी इकट्ठा करने का चरण अब पूरा हो चुका है। अब सभी की नजर पहली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के जारी होने पर है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होने की संभावना है।


फॉर्म वितरण और डिजिटाइजेशन की स्थिति

5.54 करोड़ फॉर्म वितरित किए गए


कर्नाटक में SIR के तहत कुल 5.54 करोड़ फॉर्म वितरित किए गए थे, जिनमें से लगभग 4.46 करोड़ फॉर्म को डिजिटाइज किया जा चुका है। डेटा के अनुसार, 15,28,985 मतदाता ऐसे हैं जिनका सत्यापन नहीं हो पाया है। इसके अलावा, 65,61,607 मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं, और 16,38,839 नाम मृतकों के रूप में दर्ज किए गए हैं। लगभग 7,07,792 रिकॉर्ड डुप्लीकेट या फर्जी पाए गए हैं, जिससे ड्राफ्ट मतदाता सूची में कई नामों के शामिल न होने की आशंका बढ़ गई है।


महत्वपूर्ण तिथियाँ

इन तारीखों पर ध्यान दें


कर्नाटक में पहली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 24 अगस्त को जारी की जाएगी। इसके बाद मतदाता अपनी जानकारी में किसी भी गलती के लिए दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। दावे और आपत्तियां 24 अगस्त से 23 सितंबर तक स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।


दिल्ली में भी चल रहा है SIR अभियान

दिल्ली में भी SIR की प्रक्रिया जारी


दिल्ली में भी SIR अभियान के तहत घर-घर जाकर सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि, अभियान की समयसीमा दो बार बढ़ाई गई है, फिर भी केवल 66.84 फीसदी फॉर्म ही पुराने मतदाता रिकॉर्ड से डिजिटाइज हो पाए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की मतदाता सूची में 33 फीसदी से अधिक यानी 48 लाख से ज्यादा फॉर्म अभी भी जमा या डिजिटाइज नहीं हुए हैं। ऐसे में इन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में छूटने की संभावना है। हालांकि, उन्हें बाद में दावा और आपत्ति के माध्यम से अपने नाम को जोड़ने या रिकॉर्ड में सुधार करने का अवसर मिलेगा। वर्तमान में दिल्ली सहित 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का तीसरा चरण चल रहा है।