कर्नाटक में सत्ता संघर्ष: जनवरी में संभावित निर्णय
सत्ता संघर्ष का निर्णय
कर्नाटक में राजनीतिक संकट का समाधान जनवरी के पहले सप्ताह में होने की संभावना थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के एक समर्थक ने आठ जनवरी को बदलाव की घोषणा की थी। यह भी बताया गया था कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राहुल गांधी की मुलाकात पांच या छह जनवरी को दिल्ली में होगी। हालांकि, इस मुद्दे पर राहुल गांधी ने अब तक कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। कांग्रेस के महासचिव रणदीप सुरजेवाला और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस मामले को देख रहे हैं। पहले यह जानकारी मिली थी कि राहुल गांधी दोनों नेताओं से मिलकर निर्णय लेंगे, लेकिन अब यह मामला टलता हुआ प्रतीत हो रहा है क्योंकि राहुल गांधी वर्तमान में देश से बाहर हैं और 10 जनवरी से कांग्रेस का मनरेगा बचाओ आंदोलन शुरू होने वाला है।
जनवरी के पहले सप्ताह में निर्णय की बात इसलिए की जा रही थी क्योंकि सिद्धारमैया कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने वाले थे। वे देवराज अर्स का रिकॉर्ड तोड़ने वाले थे। कहा जा रहा था कि इसके बाद वे सत्ता छोड़ देंगे। दूसरी ओर, यह भी कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया किसी भी स्थिति में सत्ता नहीं छोड़ने वाले हैं। 27 दिसंबर को जब वे कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल होने दिल्ली आए थे, तब उन्होंने मंत्रिमंडल में फेरबदल और प्रदेश में नए कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति की मांग की थी। पिछले ढाई साल से शिवकुमार दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और लगभग पांच साल से कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। यदि सिद्धारमैया उन्हें अध्यक्ष पद से हटाना चाहते हैं और कैबिनेट में बदलाव की योजना बना रहे हैं, तो सत्ता छोड़ने की बात का कोई अर्थ नहीं है। इस प्रकार, जनवरी में इस मुद्दे पर कोई निर्णय होने की संभावना कम लग रही है।